भिण्ड , अप्रैल 19 -- मध्यप्रदेश में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी प्रक्रिया को लेकर पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह ने भिण्ड जिले के लहार और रौन क्षेत्र में मप्र-यूपी सिंडिकेट के जरिए करोड़ों रुपए के घोटाले का आरोप लगाया है। उन्होंने खाद्य अधिकारियों और भाजपा नेताओं की सांठगांठ को जिम्मेदार बताया है।

डॉ. सिंह ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में गेहूं की बाजार कीमत करीब 2100 रुपए प्रति क्विंटल है, जबकि मध्यप्रदेश में बोनस सहित 2625 रुपए प्रति क्विंटल मिल रहा है। इस अंतर का फायदा उठाकर यूपी का सस्ता गेहूं फर्जी पंजीयन के जरिए एमपी के उपार्जन केन्द्रों पर खपाया जा रहा है, जिससे प्रति क्विंटल 500 रुपए से अधिक का नुकसान सरकार को हो रहा है।

उन्होंने दावा किया कि लहार क्षेत्र के उपार्जन केन्द्रों पर खरीदी शुरू होने से पहले ही 4 से 5 हजार क्विंटल गेहूं भरा मिला। किसानों के स्लॉट बुक होने से पहले ही नागरिक आपूर्ति निगम का बारदाना माफियाओं तक पहुंचा दिया गया। प्रशासनिक छापेमारी में हजारों क्विंटल गेहूं खुले में और बोरियों में भरा मिला, जिसे जल्दबाजी में भरवाया जा रहा था।

पूर्व नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि उपार्जन केन्द्र बनाने के लिए जिला खाद्य अधिकारी द्वारा प्रति केन्द्र 5 लाख रुपए तक वसूले जा रहे हैं और दूरस्थ, दुर्गम स्थानों पर केन्द्र स्थापित किए गए हैं, जिससे माफियाओं को आसानी हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ भाजपा नेताओं के संरक्षण में यह पूरा खेल संचालित हो रहा है।

डॉ. सिंह ने कहा कि इस कथित भ्रष्टाचार के कारण वास्तविक किसान परेशान हैं। पोर्टल और सर्वर की समस्याओं के चलते किसानों को स्लॉट नहीं मिल पा रहा है और वे कम कीमत पर मंडियों में गेहूं बेचने को मजबूर हैं।

उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि कार्रवाई नहीं हुई तो वे सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे। साथ ही शासन को हुए नुकसान की भरपाई दोषियों की संपत्ति कुर्क कर किए जाने की मांग भी की।

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