पुणे , सितंबर 18 -- उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने शुक्रवार को कहा कि शहरी विकास को केवल बड़ी और आकर्षक इमारतों के निर्माण से नहीं मापा जाना चाहिए, बल्कि इसमें कला, संस्कृति और परंपराओं का संरक्षण भी शामिल होना चाहिए।

स्वारगेट स्थित श्री गणेश कला क्रीड़ा रंगमंच पर 38वें पुणे फेस्टिवल के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए श्री राधाकृष्णन ने कहा कि भारतीय संस्कृति की जड़ों को छोड़कर विकास हासिल नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि विदेशी संस्कृतियों और जीवनशैली की नकल करने के बजाय भारतीय परंपराओं को संरक्षित करने की आवश्यकता है।

उपराष्ट्रपति ने किलों और तमिल साहित्य को संरक्षित करने में छत्रपति शिवाजी महाराज के योगदान, गणेशोत्सव को जन-आंदोलन में बदलने में लोकमान्य तिलक की भूमिका और संविधान के माध्यम से डॉ. बी.आर. अंबेडकर के योगदान को याद किया। उन्होंने महात्मा गांधी और डॉ. अंबेडकर के बीच हुए ऐतिहासिक पूना पैक्ट का भी जिक्र किया।

श्री राधाकृष्णन ने कहा कि शिक्षा का केंद्र माने जाने वाले पुणे में कई महत्वपूर्ण सैन्य संस्थान भी हैं। उन्होंने सिम्बायोसिस विश्वविद्यालय में अलग-अलग देशों के छात्रों की सांस्कृतिक प्रस्तुति को 'विविधता में एकता' का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि पुणे फेस्टिवल कला के विभिन्न रूपों और सांस्कृतिक परंपराओं को एक मंच पर लाता है और कलाकारों का आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद करता है।

महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अगले साल के फेस्टिवल में वे मराठी में भाषण देंगे और वे यह भाषा सीखने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पुणे ने आईटी, ऑटोमोबाइल, शिक्षा और सांस्कृतिक क्षेत्रों के ज़रिए देश में एक खास पहचान बनायी है।

उप मुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने कहा कि 38 साल पहले सुरेश कलमाडी द्वारा शुरू की गयी सांस्कृतिक पहल अब एक बड़े फेस्टिवल का रूप ले चुकी है। उन्होंने कहा कि पुणे फेस्टिवल ने कला और संस्कृति के ज़रिए पीढ़ियों को जोड़ा है। दो साल पहले स्वर्गीय अजीत पवार के साथ फेस्टिवल में अपनी भागीदारी को याद करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी कमी महसूस हो रही है। उन्होंने यह भी कहा कि वे फेस्टिवल के लिए राज्य सरकार से आर्थिक मदद दिलाने की कोशिश करेंगी।

सांस्कृतिक मामलों के मंत्री आशीष शेलार ने महाराष्ट्र की संत परंपरा और मिली-जुली संस्कृति वाली विरासत पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि इस फेस्टिवल ने कलाकारों को एक मंच दिया है और परंपरा व इतिहास को बचाए रखने के साथ-साथ आधुनिकता को अपनाने की ज़रूरत पर भी ज़ोर दिया।

अड़तीसवां पुणे फेस्टिवल इसके संस्थापक एवं पूर्व सांसद सुरेश कलमाड़ी की याद में आयोजित किया गया है। उद्घाटन समारोह के दौरान उनके कामों पर बनी नौ मिनट की एक फ़िल्म दिखायी गयी।

दिग्गज अभिनेता मोहन जोशी को पहली बार शुरू किया गया 'सुरेश कलमाड़ी पुणे फेस्टिवल लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड' दिया गया। जाने-माने फ़िल्म निर्माता किरण शांताराम, नाटककार-निर्देशक अतुल पेठे, भारतीय महिला हॉकी एसोसिएशन की पूर्व अध्यक्ष अर्नवाज़ दमनिया और फ़्लाइंग ऑफ़िसर निधि सुधीर अग्रवाल को भी पुणे फेस्टिवल अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। सार्वजनिक गणेशोत्सव मनाने के 100 साल पूरे करने वाले 'रणमर्द शिवाजी मंडल' और 'श्री हनुमान मंडल प्रतिष्ठान' को भी सम्मानित किया गया।

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