कोझिकोड , अक्टूबर 16 -- उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने शुक्रवार को विकास को आगे बढ़ाने के साथ-साथ देश की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने का आह्वान करते हुए कहा कि आधुनिकीकरण के बीच देश के सभ्यतागत मूल्य ताकत और दिशा प्रदान करते रहेंगे।
उन्होंने यहां 'नवरात्र सर्गोत्सवम् 2026' का उद्घाटन करते हुए कहा कि यह त्योहार यह कालातीत संदेश देता है कि साहस को डर पर विजय पानी चाहिए, धर्म को अधर्म पर हावी होना चाहिए और ज्ञान को अज्ञानता को दूर करना चाहिए। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने 'संघ नूट्टांडिले अक्षर मुद्रकल' पुस्तक का विमोचन किया और ललित कलाओं में उनके योगदान के लिए पी. आर. राजेंद्रन को 'सर्ग केसरी पुरस्कार' से सम्मानित किया।
श्री राधाकृष्णन ने कहा कि नवरात्र 'आदि पराशक्ति' का उत्सव मनाती है, जो सृष्टि, शक्ति, ज्ञान और करुणा का प्रतिनिधित्व करने वाली दिव्य स्त्री शक्ति हैं। उन्होंने कहा कि भारत भर में नवरात्र मनाने के विविध तरीके देश के साझा सभ्यतागत बंधनों को कम नहीं करते, बल्कि वे 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' की भावना को दर्शाते हैं।
उपराष्ट्रपति ने 'विकास भी, विरासत भी' के दृष्टिकोण पर जोर देते हुए कहा कि विरासत और विकास को एक साथ आगे बढ़ना चाहिए। भारत की सांस्कृतिक जड़ों की तुलना बरगद के पेड़ से करते हुए उन्होंने कहा कि परंपराएं और मूल्य एक मजबूत आधार प्रदान करते हैं, भले ही देश आधुनिकीकरण के माध्यम से अपने क्षितिज का विस्तार कर रहा हो।
उन्होंने उत्सव के आयोजन के लिए 'केसरी वीकली' को बधाई दी और मलयालम पत्रकारिता, लोकतांत्रिक मूल्यों के संवर्धन और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा में इसकी भूमिका की सराहना की।
इस कार्यक्रम में तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर, राज्यसभा सांसद सी. सदानंदन मास्टर, नवरात्र सर्गोत्सवम समिति की अध्यक्ष विधुबाला, कार्यकारी अध्यक्ष ए. के. प्रशांत और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
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