नयी दिल्ली , अप्रैल 01 -- उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने बुधवार को यहां संसद परिसर के संविधान सदन में राज्यसभा सांसद सुधा मूर्ति द्वारा लिखित पुस्तक 'टाइड्स ऑफ टाइम: भारत्स हिस्ट्री थ्रू म्यूरल्स इन पार्लियामेंट' का विमोचन किया।
श्री राधाकृष्णन ने पुस्तक की सराहना करते हुए अपने संबोधन में कहाकि इसमें संसद की भित्ति चित्रों की शाश्वत सुंदरता और गहरी प्रतीकात्मकता को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने कहा कि यह चित्र केवल कलाकृतियां नहीं, बल्कि भारत की सभ्यतागत यात्रा को दर्शाने वाली जीवंत कहानियां हैं, जो पीढ़ियों को इतिहास से जोड़ती हैं।
उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि भारत की लोकतांत्रिक परंपराएं प्राचीन काल से ही समावेशी और समाज में गहराई तक समाई हुई हैं। उत्तर में वैशाली से लेकर दक्षिण की कुडावोलाई प्रणाली तक, संवाद, सहमति और विविध विचारों के सम्मान की परंपरा भारत को "लोकतंत्र की जननी" बनाती है।
उपराष्ट्रपति ने सुब्रमण्यम भारती के विचारों का उल्लेख करते हुए भारत की सांस्कृतिक समृद्धि और ज्ञान परंपरा को रेखांकित किया। उन्होंने इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संसद में पारंपरिक प्रतीकों के समावेश की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक 124 भित्ति चित्रों के माध्यम से भारत के इतिहास को जीवंत करती है, जिसमें सिंधु घाटी सभ्यता से लेकर महर्षि वाल्मीकि, चाणक्य, महावीर और गौतम बुद्ध की शिक्षाओं तक का विस्तृत उल्लेख है। उन्होंने कहा कि पुस्तक में महात्मा गांधी और सुभाष चंद्र बोस जैसे महान नेताओं के योगदान सहित स्वतंत्रता संग्राम के महत्वपूर्ण अध्यायों को भी समाहित किया गया है।
श्री राधाकृष्णन ने 'विकास भी, विरासत भी' के सिद्धांत को दोहराते हुए कहा कि विकास और सांस्कृतिक विरासत एक-दूसरे के पूरक हैं। उन्होंने नागरिकों से "राष्ट्र प्रथम" की भावना अपनाने और ईमानदारी व समर्पण के साथ देश सेवा करने का आह्वान किया।
इस कार्यक्रम में ओम बिरला, जेपी नड्डा, मनोहर लाल, हरिवंश सहित कई गणमान्य व्यक्ति, सांसद और लोकसभा-राज्यसभा सचिवालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
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