दीमापुर , मार्च 08 -- नागालैंड में सरकारी कार्यक्रमों में 'वंदे मातरम' गाने को लेकर जारी विवाद के बीच उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन की मौजूदगी में नागालैंड विश्वविद्यालय के छात्रों और शोधार्थियों ने विश्वविद्यालय के 8वें दीक्षांत समारोह के दौरान राष्ट्रीय गीत के गायन का बहिष्कार किया।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में देखा गया कि शुक्रवार को जुन्हेबोटो जिले के लुमामी परिसर में आयोजित समारोह की शुरुआत और समापन पर जब यह गीत बजाया गया, तब छात्र और शोधार्थी अपनी सीटों पर बैठे रहे।

इस समारोह में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे।

खबरों के मुताबिक, नागालैंड विश्वविद्यालय छात्र संघ (लुमामी कैंपस) ने 'नागा स्टूडेंट्स फेडरेशन' (NSF) के निर्देश पर इस गीत को बजाये जाने का विरोध किया। एनएसएफ सत्ताधारी 'नागा पीपुल्स फ्रंट' (एनपीएफ) और नागालैंड के कुछ चर्च संगठनों ने गृह मंत्रालय के उस निर्देश का विरोध किया है, जिसमें साल की शुरुआत में आधिकारिक कार्यक्रमों और शैक्षणिक संस्थानों में राष्ट्रगान से पहले 'वंदे मातरम' बजाना या गाना अनिवार्य किया गया था। एनएसएफ का तर्क है कि यह निर्देश नागा सांस्कृतिक भावनाओं, धार्मिक मान्यताओं और अनुच्छेद 371(ए) के तहत मिलने वाले संवैधानिक संरक्षण की अनदेखी करता है।

वहीं एनपीएफ ने विद्यालयों और विधायी कार्यवाही में इस गीत को बजाये जाने का विरोध करते हुए इसे 'जबरन थोपना' करार दिया है। नागालैंड जॉइंट क्रिश्चियन फोरम (एनजेसीएफ) जैसे ईसाई संगठनों का कहना है कि इस गीत के कुछ हिस्से ईसाई मान्यताओं के खिलाफ हैं।

यह मुद्दा तीन मार्च को नागालैंड विधानसभा में भी उठा था। कई विधायकों ने ईसाई बहुल राज्य के लिए इसे "अनुचित" बताते हुए राष्ट्रीय गीत का विरोध किया, जबकि भाजपा विधायक और पर्यटन एवं उच्च शिक्षा मंत्री तेमजेन इम्ना अलोंग ने सदस्यों से राष्ट्रीय गीत को उसके ऐतिहासिक और धर्मनिरपेक्ष संदर्भ में देखने का आग्रह किया।

उन्होंने यह भी कहा कि गृह मंत्रालय के निर्देश को अनुच्छेद 371(ए) या ईसाई धर्म के उल्लंघन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

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