नैनीताल , सितंबर 24 -- उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम (उपनल) कार्मिकों के नियमितीकरण से जुड़े मामले में प्रदेश सरकार और उपनल कार्मिक अब आमने-सामने आने के मूड में हैं। दोनों पक्षों ने वरिष्ठ अधिवक्ताओं की फौज मैदान में उतार दी है।

मामले के अनुसार उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने वर्ष 2018 कुंदन सिंह बनाम राज्य सरकार मामले में महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए प्रदेश में विभिन्न महकमों में तैनात उपनल कार्मिकों के विनियमितिकरण के साथ ही अन्य महत्वपूर्ण निर्देश दिए थे। माना जा रहा था कि इस निर्णय से प्रदेश के 22000 कार्मिकों पर असर पड़ेगा।

राज्य सरकार की गले की फांस बने इस आदेश को उसने उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी लेकिन शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार की विशेष अपील को खारिज कर दिया। इसके बावजूद राज्य सरकार की ओर से उच्च न्यायालय के आदेश का अनुपालन नहीं किया गया।

इसके बाद उपनल कार्मिकों की ओर से वर्ष 2024 में शासन के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की गई। न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रही है। इस दौरान अदालत ने सरकार को खंडपीठ के आदेश के शीघ्र अनुपालन के सख्त निर्देश दिए लेकिन अभी तक सरकार की ओर से इसको लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। सरकार की ओर से न्यूनतम वेतनमान देने की बात भी कही गई लेकिन उपनल कार्मिकों का आरोप है कि प्रदेश सरकार धरातल पर ठोस कदम नहीं उठा रही है तथा टालमटोल रवैया अपना रही है।

अब सरकार की ओर से केन्द्र सरकार के सोलिसिटर जनरल तुषार मेहता को पैरवी के लिए मैदान में उतारा गया है। उपनल कार्मिक भी इस मामले को हाथ से नहीं जाने देना चाहते और उन्होंने भी उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता जीएन शर्मा और एसआरएस सिंह को मामले की ठोस पैरवी की जिम्मेदारी सौंपी है।

आज अदालत में दोनों पक्षों के अधिवक्ता पेश हुए। राज्य सरकार की ओर से श्री मेहता की ओर से शपथपत्र पेश करते हुए कहा गया कि सरकार ने कुछ बिंदुओं का अनुपालन कर दिया है और सुनवाई के दौरान अपना पक्ष रखेगी।

दूसरी ओर उपनल कार्मिकों की ओर से सरकार पर टालमटोल का आरोप लगाया गया। यह भी कहा कि सरकार विनियमितिकरण के साथ ही न्यूनतम वेतनमान और जीएसटी कटौती के संबंध में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। उल्टा उपनल कार्मिकों से बांड भरवाया जा रहा है। जिन कार्मिकों ने बांड नहीं भरा उनका वेतन रोका जा रहा है।

अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अब किसी को और मौका नहीं देने की बात कही और अवमानना मामले में अंतिम सुनवाई करने की बात दोहराई। अदालत ने दोनों पक्षों को लिखित तथ्य पेश करने को भी कहा है। इस मामले में आगामी सात अक्टूबर को सुनवाई होगी।

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