नैनीताल , अप्रैल 07 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम (उपनल) कर्मियों के विनियमितिकरण के मामले में दायर अवमानना याचिकाओं पर मंगलवार को सुनवाई करते हुए प्रदेश के कार्मिक सचिव शैलेश बगौली को आगामी 20 अप्रैल को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने के निर्देश दिए हैं।

न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की पीठ में आज उपनल कर्मचारी संघ के साथ ही कुल पांच अवमानना याचिकाओं पर सुनवाई हुई। याचिकाकर्ताओं कि ओर से कहा गया कि उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने 12 नवंबर 2018 को एक आदेश जारी कर उपनल कार्मिकों के विनियमितिकरण के साथ ही उन्हें महंगाई भत्ता (डीए) के भुगतान और उपनल कार्मिकों के वेतन से जीएसटी नहीं काटने के निर्देश दिये थे।

याचिकाकर्ताओं की ओर से यह भी कहा गया कि इसी मामले में उच्चतम न्यायालय से भी सरकार की समीक्षा याचिका (रिव्यू पिटिशन) खारिज हो चुकी है।

इसके बावजूद प्रदेश सरकार उपनल कार्मिकों का अभी तक विनियमितीकरण नहीं कर रही है। यही नहीं डीए का भुगतान भी नहीं किया जा रहा है और नहीं जीएसटी काटने पर रोक लगी है।

यह भी कहा गया कि सरकार नियमित पदों पर नियमित भर्ती कर रही है जो कि गलत है।

प्रदेश सरकार की ओर से कहा गया है कि केबिनेट उपसमिति की सिफारिश के बाद प्रदेश सरकार की ओर से उपनल कार्मिकों को समान कार्य समान वेतन का चरणबद्ध भुगतान किया जा रहा है। वर्ष 2018 कट आफ डेट रखी गई है। यह भी कहा गया कि इसके लिए कार्मिकों और संबद्ध विभाग के बीच अनुबंध का प्रावधान है।

उपनल कर्मचारी संघ की ओर से अनुबंध पत्र पर भी सवाल उठाए गए। अंत में अदालत ने सभी सवालों के जवाब जानने के लिए कार्मिक सचिव बगौली को 20 अप्रैल को अदालत में पेश होने के निर्देश दिए हैं।

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