देहरादून , नवंबर 16 -- जन संघर्ष मोर्चा अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने उत्तराखंड के राज्यपाल व सेवानिवृत लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह से रविवार को एक बार फिर उपनल कर्मियों के नियमितीकरण मामले में उच्चतम न्यायालय के आदेश की परिपालना कराने की मांग की है।

श्री नेगी ने आज यहां कहा कि उपनल कर्मियों की राह में रोडा अटकाने के लिए राज्य सरकार द्वारा की गई शीर्ष अदालत में दायर रिव्यू पिटिशन भी खारिज हो चुकी है। ऐसे में राजभवन का दायित्व बनता है कि सरकार को तत्काल आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दे। उन्होंने कहा कि इसके साथ राजभवन का यह भी दायित्व बनता है कि लगभग एक सप्ताह से उच्च न्यायालय के आदेशों की अनुपालना कराने को आंदोलित उपनल कर्मियों की भी सुध लेने का सरकार को निर्देश दे।

श्री नेगी ने बताया कि कि उच्च न्यायालय के आदेश दिनांक 12 नवम्बर 2018 द्वारा उपनलकर्मियों को नियमितीकरण व अन्य लाभ प्रदान किए जाने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन आदेशों की अनुपालना करने के बजाय उक्त फैसले के खिलाफ सरकार द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में एसएलपी दायर की गई थी, जिसको न्यायालय ने 15 अक्टूबर, 2024 को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय में सरकार की एसएलपी खारिज होने के उपरांत सरकार को तत्काल नियमितीकरण एवं अन्य लाभ देने चाहिए थे, किंतु इसके विपरीत सरकार ने 8 नवम्बर, 2024 को रिव्यू पिटिशन दायर कर कर्मियों के भविष्य पर प्रश्नचिह्न लगा दिया था, लेकिन हाल ही में इसी वर्ष 11 नवम्बर को सरकार की रिव्यू पिटीशन भी खारिज हो गई। उन्होंने कहा कि सरकार को न्यायालय के निर्देश के आलोक में उपनल कर्मियों को इनका हक देना चाहिए। उन्होंने कहा कि अब कई तरह की कमेटियाँ गठित कर सरकार एक तरफ से टाइम पास करना चाहती है।

जन संघर्ष मोर्चा नेता ने दुख जताते हुए कहा कि प्रदेश का इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या होगा कि विधायक और मंत्री सरकारी सेवक न होते हुए भी लाखों रुपए वेतन-भत्ते के रूप में लूट रहे हैं तथा वहीं दूसरी और सरकार इन कर्मचारियों को कुछ देना नहीं चाहती। मोर्चा ने राजभवन से मांग की कि सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट के आदेशों की अनुपालना सुनिश्चित कराने के निर्देश सरकार को दे।

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