चंडीगढ़ , जुलाई 21 -- हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने उपचारित अपशिष्ट जल (टीडब्ल्यूडब्ल्यू) के वैज्ञानिक और योजनाबद्ध उपयोग पर जोर देते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि राज्य में कोई भी उपचारित जल व्यर्थ न जाए। श्री सैनी कहा कि उपचारित जल का अधिकतम उपयोग कर भूजल और पेयजल स्रोतों पर दबाव कम किया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने सभी एसटीपी और सीईटीपी का व्यापक मानचित्रण कर उनकी क्षमता उपलब्ध उपचारित जल और उपयोग की विस्तृत प्रोफाइल तैयार करने के निर्देश दिए।
समीक्षा बैठक में बताया गया कि पहले चरण में 500 करोड़ रुपये की परियोजना के तहत 35 एसटीपी शामिल किए गए हैं, जिनमें से 19 पर कार्य पूरा हो चुका है। इससे करीब 40 हजार एकड़ कृषि भूमि को लाभ मिलेगा। विजन-2047 के तहत मार्च 2031 तक राज्य में उत्पन्न शत-प्रतिशत उपचारित अपशिष्ट जल के पुन: उपयोग का लक्ष्य रखा गया है।
मुख्यमंत्री ने उपचारित जल की प्राथमिक आपूर्ति ताप विद्युत संयंत्रों, हरित क्षेत्रों, पार्कों और कृषि के लिए सुनिश्चित करने तथा उद्योगों को भी ताजे पानी के स्थान पर उपचारित जल उपयोग के लिए प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को समन्वित कार्ययोजना बनाकर 15 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने को कहा। साथ ही एसटीपी के संचालन में बिजली खर्च कम करने के लिए कुसुम योजना के तहत सौर ऊर्जा प्रणाली लगाने और सभी संयंत्रों को 24 घंटे संचालित रखने के निर्देश भी दिए।
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