नयी दिल्ली , जून 15 -- भारत ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण-यान पीएसएलवी की पिछले वर्ष एक के बाद एक लगातार दो बार प्रक्षेपण के दौरान विफलता के बाद प्रक्षेपण गतिविधियों में आए ठहराव को देखते हुए अब इस माह के अंत या अगले महीने से प्रक्षेपण का सिलसिला फिर शुरू करने जा रहा है।
यह जानकारी केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ जितेन्द्र सिंह ने सोमवार यहां एक संवाददाता सम्मेलन में दी। उन्होंने कहा कि भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में विफलताओं की दर पश्चमी देशों की तुलना में काफी कम है।
डॉ सिंह ने कहा कि पीएसएलवी के पिछले दो प्रक्षेपणों में उस तरह की सफलता नहीं मिली जिसकी अपेक्षा थी, पर उनमें आये व्यवधानों और कमियों का आकलन कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि जहां कमी देखी गयी उसका परिमार्जन किया गया है और अब जून माह के अंत या अगले माह के शुरू में प्रक्षेपण फिर शुरू करने की तैयारी है। डॉ सिंह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के 12 साल में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र में देश की प्रगति की जानकारी देने के लिए आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। "भारत की सेवा में विज्ञान के 12 वर्ष" विषय पर इस विशेष संवाददता सम्मेलन का आयोजन वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) ने किया था। संवाददाता सम्मेलन को सीएसआईआर की महानिदेशक डॉ. एन. कलैसेल्वी और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय में जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव राजेश सुधीर गोखले में पिछले 12 वर्ष में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के विभिन्न क्षेत्रों में हुई प्रगति की जानकारी दी और इस दौरान हुई उपलब्धियों को अभूतपूर्व बताया।
परमाणु ऊर्जा विभाग तथा अंतरिक्ष विभाग के राज्यमंत्री का भी दायित्व संभाल रहे डॉ सिंह ने सवाल-जवाब के दौरान पीएसएलवी की हाल की विफलताओं से देश के उपग्रह प्रक्षेपण कार्यक्रम पर प्रभाव के बारे में पूछे जाने पर कहा, ''अंतरिक्ष के क्षेत्र में (मिशन के लिए) विफलता शब्द का प्रयोग नहीं किया जाता। यह जरूर है कि पीएसएलवी में लगातार दो बार उस तरह की सफलता नहीं मिली जिसकी अपेक्षा की जा रही थी। पर यदि हम उसे विफलता भी मान लें तो अपनी विफलताओं की दर अमेरिका और यूरोप की तुलना में बहुत कम है।"डॉ सिंह ने कहा कि हमारे चंद्रयान और मंगलयान मिशन पहले प्रयासों में ही सफल रहे जबकि पश्चिमी देशों को तीन-तीन प्रयास करने पड़े। चंद्रमा (दक्षिणी ध्रुव पर) यान उतारने के हमारे में मिशन की सफलता के समय ही रुस का मिशन पूरा नहीं हो सका था।" उन्होंने कहा कि ऐसे अभियानों में कुछ ऐसे नये अनुभव और व्यवधान आते हैं जिनका पहने से अनुमान नहीं लगाया जा सकता वे अनुभव सीख देते हैं।
उल्लेखनीय है कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का पीएसएलवी-सी61 मिशन 18 मई 2025 को उड़ान के तीसरे चरण में तकनीकी खराबी के कारण विफल हो गया था। इस रॉकेट से धरातल के अवलोकन के लिए एक उपग्रह को उसकी लक्षित सूर्य-तुल्यकालिक ध्रुवीय कक्षा में स्थापित करना था, जिसे पूरा नहीं किया जा सका।
पीएसएलवी-सी62 मिशन इस साल 12 जनवरी को उड़ान भरने के कुछ मिनट बाद तीसरे चरण में तकनीकी खराबी आने के कारण विफल हो गया था। इस मिशन में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ( डीआरडीओ) के 'ईओएस-एन 1' (अन्वेषा) उपग्रह और 15 अन्य उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजा जा रहा था। उसके बाद से इसरो के प्रक्षेपण कार्यों में एक तरह का ठहराव दिख रहा था। डॉ सिंह ने स्पष्ट किया कि अंतरिक्ष विभाग इस माह के अंत या अगले माह के शुरू से प्रक्षेपण का सिलसिला पुन: शुरू करने को तैयार है।
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