चंडीगढ़ , नवंबर 17 -- विश्व एमएसएमई फोरम ने सोमवार को पंजाब के उद्योग मंत्री संजीव अरोड़ा से मुलाकात की और उन्हें उद्योगों के सामने आने वाली समस्याओं का जल्दी समाधान करने का आग्रह किया।
संगठन के अध्यक्ष बदीश जिंदल ने बताया कि उन्होंने श्री अरोड़ा को मंहगी बिजली, सौर ऊर्जा के 100 प्रतिशत उपयोग की अनुमति, उद्योग स्थापित करने के लिए 100 फुट ज़मीन खाली करने की गलाडा की शर्त की जांच, रद्द किये गये भूखंडों की बहाली, भूखंडों की कीमतें निर्धारित करने, पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को मनमाने ढंग से उद्योगों को बंद करने आदि जैसी कई अन्य समस्याओं से अवगत करवाया गया।
उद्योग मंत्री, जिनके पास नवीकरणीय ऊर्जा विभाग भी है, ने कहा कि सरकार पहले ही पंजाब में सौर ऊर्जा उत्पादन को अधिकतम करने के लिए प्रतिबद्ध है और राज्य के इस्पात उद्योगों को 100 प्रतिशत तक सौर ऊर्जा की अनुमति देने के संघ के अनुरोध पर विचार करेगी।
औद्योगिक क्षेत्रों में उद्योग, सिधवां नहर के किनारे किसी भी उद्योग की स्थापना के लिए 100 फुट ज़मीन खाली करने की गलाडा की शर्त की जांच की मांग की गयी, जबकि नगर निगम सिधवान नहर के किनारे उद्योगों के लिए ऐसी कोई शर्त नहीं लगा रहा है। इस पर उद्योग मंत्री ने आश्वासन दिया कि सरकार भूमि परिवर्तन के लिए निजी सड़कों को मंज़ूरी देने के अनुरोध पर विचार करेगी। उद्योग विभाग, सिधवान नहर के किनारे उद्योग स्थापित करने के लिए 100 फुट ज़मीन खाली करने के संबंध में गलाडो की शर्त की जांच करेगा।
पंजाब लघु उद्योग एवं निर्यात निगम से संबंधित मुद्दों के संबंध में उद्योग मंत्री को बताया गया कि पीएसआइईसी ने रद्द किये गये भूखंडों की बहाली के लिए आवेदन मांगे हैं। उद्योगों ने पीएसआइईसी को 300 आवेदन प्रस्तुत किये, लेकिन अभी तक केवल 20 को ही मंज़ूरी मिली है। श्री अरोड़ा ने विभाग के अधिकारियों को मौके पर बुलाया और इस महीने के अंत तक सभी आवेदनों का निपटारा करने का आदेश दिया। उद्योग मंत्री को यह भी बताया गया कि पीएसआइईसी की फ्रीहोल्ड औद्योगिक भूखंड योजना के तहत लिया जाने वाला शुल्क बहुत अधिक है और इसे कम किया जाना चाहिए।
श्री अरोड़ा ने बताया कि पीएसआईईसी औद्योगिक भूखंडों को फ्रीहोल्ड करने की योजना जल्द ही शुरू की जाएगी। इस योजना के तहत, भूखंडों को बहुत कम शुल्क पर फ्रीहोल्ड किया जाएगा। उद्योग मंत्री से यह भी आग्रह किया गया कि पीएसआईईसी औद्योगिक भूखंडों के लिए आरक्षित दरें भूखंडों के वास्तविक मूल्य से अधिक हैं, जिससे भूमि पंजीकरण की लागत और पीएसआईईसी को शुल्क की लागत में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है।
उद्योग मंत्री ने बताया कि सरकार अब तीन अधिकृत मूल्यांकन कर्ताओं की रिपोर्ट के आधार पर भूखंडों की कीमतें निर्धारित करेगी, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि उद्योगपति उचित मूल्य पर भूखंड प्राप्त कर सकें। उन्होंने पीएसआईईसी के भूखंडों के आरक्षित मूल्य की बढ़ी हुई लागत के मामले की भी जांच करने का आश्वासन दिया।
उद्योग मंत्री को बताया गया कि पंजाब में 100 से अधिक औद्योगिक क्लस्टर हैं, लेकिन एमएसएमई मंत्रालय की क्लस्टर विकास योजना के तहत केवल तीन सामान्य सुविधा केंद्र स्थापित किये गये हैं। इसलिए, उद्योगों की बेहतरी के लिए, सरकार को उद्योग विभाग को एमएसएमई क्लस्टर विकास योजना के तहत वर्ष 2026 में पंजाब में कम से कम 10 नये सामान्य सुविधा केंद्र बनाने का लक्ष्य देना चाहिए। उन्हें यह भी बताया गया कि उद्योग विभाग पंजाब में नये उद्योगों की स्थापना को प्रोत्साहित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है। पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड हालांकि बिना किसी चेतावनी के उद्योगों को बंद कर देता है। इसलिए, पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को मनमाने ढंग से उद्योगों को बंद करने से रोकने के लिए नियम बनाये जाने चाहिए और उद्योगों को प्रदूषण नियंत्रण प्रणालियों में सुधार के लिए कम से कम तीन सुनवाई का समय दिया जाना चाहिए।
उद्योग मंत्री को बताया गया कि विश्व एमएसएमई फोरम ने 2024 में पंजाब राज्य विद्युत नियामक आयोग को सूचित किया था कि पीएसपीसीएल के ताप विद्युत संयंत्रों में 30 से 40 प्रतिशत अधिक कीमतों पर बिजली का उत्पादन किया जा रहा है, जिसकी जांच आवश्यक है। नियामक आयोग ने कोई कार्रवाई नहीं की।
श्री जिंदल ने मंत्री को यह भी बताया कि विश्व एमएसएमई फोरम के पास पीएसपीसीएल अधिकारियों द्वारा धन के दुरुपयोग की पूरी रिपोर्ट है, जिसे किसी भी कार्रवाई के लिए विभाग को सौंप दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि कई उद्योगों ने पुरानी औद्योगिक नीति के तहत मामूली विस्तार दिखाकर सरकार से करोड़ों रुपये के प्रोत्साहन प्राप्त करना शुरू कर दिया है, जबकि इन उद्योगों ने न तो उत्पादन बढ़ाया है और न ही रोजगार। इसके अलावा, कई उद्योग इन्वेस्ट पंजाब नीति के तहत राज्य वस्तु एवं सेवा कर में छूट पाने के लिए धोखाधड़ी कर रहे हैं। ये उद्योग दूसरे राज्यों को माल बेचते हैं, लेकिन इन्वेस्ट पंजाब नीति के तहत लाभ उठाने के लिए पंजाब की एक कंपनी को बिल भेजते हैं।
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