ग्वालियर , अक्टूबर 25 -- मध्यप्रदेश के ग्वालियर में आयोजित 21वें आईटीएम उद्भव उत्सव इंटरनेशनल कल्चरल ओलंपियाड के दूसरे दिन भारतीय पौराणिक कथाओं, आध्यात्मिक आस्था और अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक विविधता का अनूठा संगम देखने को मिला। विभिन्न कॉलेजों और संस्थानों के 450 विद्यार्थियों ने क्लासिकल और सेमी क्लासिकल नृत्य की 28 प्रस्तुतियां दीं। किर्गिस्तान और उज्बेकिस्तान से आए कलाकारों ने भी अपनी सांस्कृतिक परंपराओं की झलक प्रस्तुत की।

विद्यार्थियों ने मां दुर्गा और मां काली की महिमा, महिषासुर मर्दन, भगवान शिव के तेज और श्रीकृष्ण की लीलाओं को नृत्य के माध्यम से जीवंत किया। आकर्षक वेशभूषा और भावपूर्ण प्रस्तुतियों पर दर्शकों ने तालियों से कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। सभागार महाकाल के जयकारों से गूंज उठा। प्रस्तुतियों के स्तर को देखते हुए निर्णायक मंडल ने सभी समूहों को फाइनल राउंड में भेजने का निर्णय लिया।

कार्यक्रम में मंगोलिया के राजदूत उलजीत लवसेनजात मुख्य अतिथि थे, जबकि हिमालयन कल्चर इंटरनेशनल स्कूल के अध्यक्ष डॉ. एलपी पोटसंग ने अध्यक्षता की। विशिष्ट अतिथि के रूप में आईटीएम यूनिवर्सिटी के डिप्टी रजिस्ट्रार अनिल माथुर उपस्थित रहे। उद्भव संस्था के अध्यक्ष डॉ. केशव पाण्डेय और सचिव दीपक तोमर सहित अन्य पदाधिकारी भी मौजूद थे। प्रस्तुतियों के बाद प्रतिभागी समूहों के टीम लीडरों को स्मृति चिह्न भेंट किए गए।

डेली कॉलेज इंदौर के विद्यार्थियों ने मां दुर्गा और मां काली के विभिन्न स्वरूपों पर आधारित नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की। केडीबी पब्लिक स्कूल, गाजियाबाद के विद्यार्थियों ने रुद्राक्ष की उत्पत्ति और भगवान शिव की महिमा का चित्रण किया। आगरा के प्रेलुद संस्थान के विद्यार्थियों ने 'गोविंद बोलो हरि गोपाल' भजन पर भगवान विष्णु के अवतारों की गाथा प्रस्तुत की। नृत्यसंगम एमआईटीएस के कलाकारों ने चारों युगों के माध्यम से सत्य की विजय, राधा-कृष्ण की लीलाओं, श्रीकृष्ण के विराट स्वरूप और गीता के उपदेशों को दर्शाया। प्रस्तुति में कलियुग के बढ़ते स्वार्थ और प्रकृति को हो रहे नुकसान पर भी चिंता व्यक्त की गई। शिखा शाइन डांस अकादमी के कलाकारों ने कृष्ण की रासलीलाओं पर प्रस्तुति दी।

कल्याणिका केंद्रीय शिक्षा निकेतन, अमरकंटक के विद्यार्थियों ने संबलपुरी लोकनृत्य के जरिए जनजातीय जीवनशैली और लोक संस्कृति को दर्शाया। संस्कृति द गुरुकुल, गुवाहाटी के कलाकारों ने क्षेत्रीय परंपराओं और मां भवानी की आराधना प्रस्तुत की। डीपीएस ग्वालियर के विद्यार्थियों ने चंबल क्षेत्र की लांगुरिया लोक परंपरा पर आधारित प्रस्तुति दी, जबकि डेली कॉलेज इंदौर के कलाकारों ने महाराष्ट्र में मां दुर्गा भवानी की आराधना को नृत्य के माध्यम से प्रदर्शित किया। डीपीएस इंटरनेशनल, गुरुग्राम के विद्यार्थियों ने ग्रामीण परिवेश और शेर की कहानी पर आधारित प्रस्तुति दी।

उत्सव के अंतर्गत आयोजित उद्भव एमयूएन यानी मॉडल यूनाइटेड नेशंस में देश के विभिन्न राज्यों और विदेशों से आए विद्यार्थियों ने वैश्विक चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया। चर्चा में रूस-यूक्रेन युद्ध, अमेरिका, ईरान, इजरायल और फिलिस्तीन से जुड़े संघर्षों के साथ अंतरराष्ट्रीय शांति, वैश्विक महामारी जैसी चुनौतियों तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दुरुपयोग को रोकने के उपायों पर चर्चा हुई। इस मंच के माध्यम से विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय संबंधों, कूटनीति और वैश्विक समस्याओं को समझने का अवसर मिला।

निर्णायक मंडल में प्रो. देवयानी चटर्जी, अनु मिश्रा, वाणी माधव, बालकृष्ण मराठ, धीरज कुमार पाण्डेय और लावण्या आप्टे शामिल थे। आयोजकों के अनुसार, सोमवार को सुबह नौ बजे एकल नृत्य और शाम पांच बजे अंतिम समूह नृत्य प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। अगले दिन के कार्यक्रम में पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल डी.के. त्रिपाठी मुख्य अतिथि तथा सुप्रसिद्ध नृत्यांगना पद्मश्री डॉ. कमलिनी अध्यक्ष के रूप में शामिल होंगी।

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