पुणे , अगस्त 08 -- शिवसेना (यूबीटी) के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उन सांसदों के साथ हाल की मुलाकात पर सवाल उठाये हैं जो श्री ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना और तृणमूल कांग्रेस (तृणमूल ) से अलग हो गये थे।

श्री ठाकरे ने कहा कि जब इन मामलों पर अदालतों में सुनवाई चल रही है, तो प्रधानमंत्री ने इन बागी सांसदों से मुलाकात क्यों की? उन्होंने पूछा कि क्या इस मुलाकात का मकसद उच्चतम न्यायालय, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह या महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को कोई संदेश देना था। उन्होंने कहा, "जब मामला अदालत में चल रहा है, तो प्रधानमंत्री ने दल बदलने वाले सांसदों से मुलाकात क्यों की? वह क्या संदेश देना चाह रहे थे?"श्री ठाकरे ने उन खबरों का ज़िक्र किया, जिनमें कहा गया है कि श्री मोदी ने सांसदों को भरोसा दिलाया कि वे चिंता न करें और वह उनके साथ हैं। उन्होंने इस संदर्भ में स्वामी समर्थ से जुड़ी मशहूर कहावत 'भियू नकोस, मी तुझ्या पाठीशी आहे' (डरो मत, मैं तुम्हारे साथ हूँ) का ज़िक्र करते हुए तंज कसा।

उन्होंने कहा, "क्या मोदी अब नए स्वामी बन गए हैं?" उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री दल बदलने वालों से तो मिलने को तैयार हैं, लेकिन विरोध कर रहे छात्रों और चिंता जताने वाले अन्य वर्गों से नहीं मिल रहे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर भी श्री मोदी पर निशाना साधा।

कोविड-19 महामारी के दौरान फेसबुक लाइव के ज़रिए लोगों से बात करने पर हुई आलोचना को याद करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री अब युवाओं से व्यक्तिगत रूप से मिलने के बजाय इंस्टाग्राम मैसेज के ज़रिए बात कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, "क्या ऐसा समय आ रहा है जब देश इंस्टाग्राम के ज़रिए चलाया जाएगा?" बंद दरवाज़े के पीछे हुई बैठक में कथित तौर पर कही गयी बातों के खुलासे पर सवाल उठाते हुए श्री ठाकरे ने कहा कि इसके पीछे एक बड़ा राजनीतिक संदेश था। उन्होंने सवाल किया कि क्या बागी सांसदों को दिया गया भरोसा उच्चतम न्यायालय चल रही कार्यवाही और इस खबर से जुड़ा था कि महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे इस मामले को लेकर दबाव में थे।

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