मुंबई , अगस्त 07 -- महाराष्ट्र के उद्योग मंत्री उदय सामंत ने मराठा आरक्षण और कुणबी प्रमाण-पत्रों को लेकर मचे बवाल को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि महायुति सरकार का मराठा आरक्षण का फैसला अपरिवर्तनीय है और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) समुदायों के अधिकारों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया जायेगा।

श्री सामंत ने कार्यकर्ता मनोज जारांगे-पाटिल के हालिया दावों से बढ़ती चिंताओं को दूर करने के लिए तुरंत कदम उठाए। गौरतलब है कि श्री जारांगे-पाटिल ने आरोप लगाया था कि आधिकारिक निर्देशों के जरिए जानबूझकर मराठा दस्तावेजों को कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने भाजपा नेता चंद्रशेखर बावनकुले सहित गठबंधन के वरिष्ठ नेताओं के साथ चर्चा के बाद कहा कि पूरा विवाद अनावश्यक गलतफहमियों पर आधारित है।

श्री सामंत ने कहा, "महायुति सरकार द्वारा मराठा समुदाय के लिए लिए गए फैसलों को किसी भी परिस्थिति में नहीं बदला जायेगा। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस 10 प्रतिशत मराठा आरक्षण और कुनबी प्रमाणन ढांचे के सूत्रधार हैं। सोशल मीडिया पर कुछ लोगों द्वारा श्री एकनाथ शिंदे के खिलाफ अविश्वास पैदा करने की कोशिशें सफल नहीं होंगी।"उन्होंने पहचान की राजनीति के कारण राज्य के सामाजिक ताने-बाने पर पड़ रहे दबाव को देखते हुए अन्य समुदायों की चिंताओं को दूर करने के लिए भी काफी प्रयास किए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि मराठा समुदाय को न्याय दिलाने की प्रक्रिया में ओबीसी के हितों से कोई समझौता नहीं किया जायेगा। श्री सामंत ने पुष्टि की कि यदि वैचारिक मतभेदों को दूर करने की आवश्यकता हुई, तो प्रशासन ओबीसी नेता लक्ष्मण हाके के साथ सकारात्मक और खुली बातचीत के लिए तैयार है।

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