उदयपुर , सितम्बर 20 -- राजस्थान के उदयपुर में मानव सेवा में जुटी नारायण सेवा संस्थान के 47वें दिव्यांग एवं निर्धन सामूहिक विवाह में दिव्यांग एवं निर्धन सामूहिक विवाह समारोह में देश के विभिन्न राज्यों से आए 100 वर-वधू 50 जोड़ों के रूप में परिणय सूत्र में बंध गये।
संस्थान के सेवा महातीर्थ, बड़ी में आयोजित दो दिवसीय विवाह समारोह के दूसरे दिन रविवार को वैदिक मंत्रोच्चार, मंगलगीत और आशीर्वाद के बीच नव दंपतीयों ने गृहस्थ जीवन की नयी यात्रा शुरू की।इन विवाहों की सबसे भावुक कड़ी यह रही कि कई वर-वधुओं काे निःशुल्क उपचार, ऑपरेशन, कृत्रिम अंग अथवा सहायक उपकरण और कौशल प्रशिक्षण नारायण सेवा संस्थान में हुआ है। कभी इलाज और पुनर्वास के लिए पहुंचे ये युवक- युवतियां अब उसी परिसर से जीवनसाथी का हाथ थामकर नई गृहस्थी की ओर रवाना हुए।
संस्थान अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल ने बताया कि पिछले 22 वर्षों में संस्थान के माध्यम से 2,582 दिव्यांग युवक- युवतियों के विवाह संपन्न कराए जा चुके हैं। संस्थान का उद्देश्य दिव्यांगजनों को दया नहीं, बल्कि सम्मान, अवसर और सुरक्षित भविष्य उपलब्ध कराना है।
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