लखनऊ , अगस्त 30 -- उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष एवं देश की सर्वोच्च सेंट्रल एडवाइजरी कमेटी के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि प्रदेश की बिजली कंपनियों में हर वर्ष हजारों करोड़ रुपये की बिजली चोरी होती है। बिजली चोरी रोकने के लिए संसद द्वारा बनाए गए विद्युत अधिनियम, 2003 में कठोर दंड तथा बिजली चोरी के मामलों में राजस्व निर्धारण का प्रावधान है, इसके बावजूद प्रदेश में बिजली चोरी पर प्रभावी अंकुश नहीं लग पा रहा है।
अवधेश वर्मा ने कहा कि करीब दो वर्ष पूर्व लागू की गई छूट/माफी योजना में बिजली चोरी के राजस्व निर्धारण में 65 प्रतिशत तक की छूट दी गई। गंभीर सवाल यह है कि जब बड़े बिजली उपभोक्ताओं के करोड़ों रुपये के बिजली चोरी निर्धारण में छूट दी जा रही थी, तब यह क्यों नहीं सोचा गया कि इससे बिजली चोरी करने वालों को बढ़ावा मिलेगा और भविष्य में चोरी पर अंकुश लगाना और मुश्किल हो जाएगा?उन्होंने कहा कि यदि राष्ट्रीय स्तर पर संसद द्वारा बनाए गए विद्युत अधिनियम, 2003 के प्रावधानों के विपरीत बिजली चोरी के राजस्व निर्धारण में भारी छूट अथवा माफी दी जाती है, तो यह गंभीर कानूनी प्रश्न खड़ा करता है। गरीब एवं छोटे उपभोक्ताओं को मानवीय आधार पर राहत देने के पीछे कोई तर्क हो सकता है, लेकिन बड़े उद्योगों, वाणिज्यिक उपभोक्ताओं और बड़े विद्युत उपभोक्ताओं के करोड़ों रुपये के बिजली चोरी राजस्व निर्धारण में भी छूट देना बिजली चोरी रोकने की मूल व्यवस्था को कमजोर करता है।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा कि एक ओर ईमानदार बिजली उपभोक्ता समय से अपना पूरा बिल जमा करता है, वहीं दूसरी ओर बिजली चोरी करने वाले बड़े उपभोक्ताओं के करोड़ों रुपये के राजस्व निर्धारण में राहत दी जाती है। इससे ईमानदार उपभोक्ताओं के साथ अन्याय होता है और बिजली चोरी करने वालों में कानून का भय भी कम होता है।
उन्होंने कहा कि उपभोक्ता परिषद ने इस मामले में विद्युत नियामक आयोग से हस्तक्षेप की मांग की थी, लेकिन अपेक्षित प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। जब बिजली चोरी के मामलों में पहले ही करोड़ों रुपये के राजस्व निर्धारण में भारी छूट दी जा चुकी हो, तो भविष्य में बिजली चोरी पर प्रभावी अंकुश लगाना बहुत मुश्किल होगा।
अवधेश वर्मा ने कहा कि बिजली चोरी का आर्थिक बोझ अंततः बिजली कंपनियों और ईमानदार उपभोक्ताओं पर पड़ता है। इसलिए किसी भी राहत योजना को लागू करने से पहले यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि वह विद्युत अधिनियम, 2003 और लागू कानूनी प्रावधानों की मूल भावना के अनुरूप हो तथा उससे बिजली चोरी करने वालों को कोई गलत संदेश न जाए।
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