लखनऊ , अक्टूबर 25 -- उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा मत्स्य क्षेत्र में नवाचार आधारित गतिविधियों को बढावा देने के उद्देश्य से 'उत्तर प्रदेश मोती संवर्धन योजना' लागू की गई है। यह योजना किसानों, मत्स्य पालकों तथा ग्रामीण युवाओं को मोती उत्पादन से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। योजना के विस्तृत दिशा-निर्देशों के अनुसार इसे वैज्ञानिक, तकनीकी और पारदर्शी तरीके से संचालित किया जाएगा, इससे प्रदेश में मत्स्य आधारित उद्यमशीलता को नई गति मिलेगी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की रोजगारपरक नीतियों के तहत उ0प्र0 मोती संवर्धन योजना का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के जल संसाधनों का समुचित उपयोग कर मोती उत्पादन को बढ़ावा देना, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजित करना, किसानों की आय में वृद्धि करना तथा मत्स्य क्षेत्र में आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देना है। प्रदेश के गंगा एवं यमुना नदी के तटवर्ती क्षेत्रों में उपलब्ध मीठे पानी की सीप का उपयोग कर बड़े स्तर पर मोती उत्पादन किया जा सकता है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और विदेशी मुद्रा अर्जन की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।

इस योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार निजी भूमि पर निर्मित खेत तालाब अथवा निजी तालाबों में मोती पालन किया जाएगा। इसके लिए न्यूनतम 440 वर्गमीटर क्षेत्रफल अथवा 0.500 एकड़ से लेकर अधिकतम 1 एकड़ तक के तालाब होना जरूरी है। जिन तालाबों में वर्षभर न्यूनतम 1.50 मीटर जल स्तर बना रहंता हो, उन्हीं को योजना में शामिल किया जाएगा। इस योजना के अंतर्गत तीन श्रेणियों में मोती पालन कराया जाएगा। पहली इकाई में 2000 सीप, दूसरी इकाई में 5000 सीप तथा तीसरी इकाई में 15000 सीपों का निवेश किया जाएगा।

2000 सीप वाली इकाई की कुल लागत 1.50 लाख रुपये निर्धारित की गई है. जिसमें सीप क्रय, न्यूक्लियस क्रय, सर्जरी, ऑक्सीजन सेंट, फीड तथा मॉनिटरिंग आदि खर्च शामिल हैं। इस इकाई से लगभग 2400 मोतियों का उत्पादन होने का अनुमान है और करीब 90 हजार रुपये तक का शुद्ध लाभप्राप्त किया जा सकेगा। 5000 सीप वाली इकाई की लागत 3.50 लाख रुपये होगी, जिससे लगभग 6000 मोतियों का उत्पादन तथा 2.50 लाख रुपये तक का अनुमानित शुद्ध लाभ प्राप्त हो सकेगा। इसी प्रकार 15000 सीपों वाली इकाई की कुल लागत 10 लाख रुपये निर्धारित की गई है, जिससे लगभग 18000 मोतियों का उत्पादन होने तथा लगभग 8 लाख रुपये तक शुद्ध लाभ मिलने का अनुमान है।

उत्तर प्रदेश मोती संवर्धन योजना का संचालन 40 प्रतिशत राज्यांश और 60 प्रतिशत लाभार्थी अंश के फंडिंग पैटर्न पर किया जाएगा। सरकार द्वारा यह योजना प्रारंभिक रूप से चयनित मंडलों के कुछ जनपदों में क्लस्टर आधारित पायलट प्रोजेक्ट के रूप में संचालित की जाएगी। प्रथम फसल (भ्ंतअमेज) के सफल उत्पादन के बाद इसे अन्य जनपदों में विस्तारित करने की कार्यवाही की जाएगी। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए मत्स्य विभाग द्वारा इम्पैनल्ड एजेंसियों का चयन किया जाएगा, जो तकनीकी मार्गदर्शन, प्रशिक्षण, निरीक्षण और परियोजना संचालन में सहयोग प्रदान करेंगी।

इस योजना के अंतर्गत यह भी निर्दिष्ट है कि मोती उत्पादन एक तकनीकी एवं संवेदनशील प्रक्रिया है, इसलिए चयनित लाभार्थियों के तालाबों में सर्जरी, न्यूक्लियस प्रत्यारोपण तथा अन्य तकनीकी कार्य इम्पैनल्ड एजेंसियों द्वारा ही कराए जाएंगे। इन एजेंसियों को विभागीय पोर्टल पर पंजीकृत किया जाएगा तथा उनके माध्यम से परियोजना की नियमित निगरानी की जाएगी। चयनित लाभार्थियों के तालाबों का कम से कम चार बार निरीक्षण करना अनिवार्य होगा। योजना के तहत लाभार्थियों का चयन जिला स्तरीय समिति द्वारा किया जाएगा। समिति की अध्यक्षता मुख्य विकास अधिकारी करेंगे। समिति में मंडलीय उप निदेशक मत्स्य, जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक, प्रगतिशील मत्स्य पालक तथा सहायक निदेशक मत्स्य को सदस्य बनाया गया है। यह समिति पात्र लाभार्थियों का चयन, आवेदन अनुमोदन तथा योजना की निगरानी करेगी।

लाभार्थियों के चयन हेतु ऑनलाइन आवेदन विभागीय पोर्टल पर आमंत्रित किए जाएंगे। चयन प्रक्रिया में ऐसे आवेदकों को प्राथमिकता दी जाएगी जिन्हें मोती पालन में कम से कम दो वर्ष अथवा मत्स्य पालन में तीन वर्ष का अनुभव हो। आवेदक के पास निजी खेत तालाब अथवा निजी भूमि पर निर्मित तालाब होना आवश्यक होगा। साथ ही लाभार्थी को तालाब में एयरेटर अथवा एरेशन सिस्टम स्थापित करना अनिवार्य होगा, ताकि जल में ऑक्सीजन की पर्याप्त मात्रा बनी रहे और मोती उत्पादन की गुणवत्ता प्रभावित न हो।

उत्तर प्रदेश सरकार की ''मोती संवर्धन योजना'' मत्स्य क्षेत्र में आधुनिक उद्यमशीलता को बढावा देने वाली महत्वाकांक्षी योजना है। यह योजना किसानों, बेरोजगार युवाओं और मत्स्य पालकों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन और आय वृद्धि का मजबूत माध्यम बनेगी।

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