विद्या शंकर राय सेलखनऊ , मई 23 -- भीषण गर्मी के बीच उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही बिजली कटौती अब बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गई है। विपक्षी दलों के साथ-साथ सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायकों ने भी अपने क्षेत्रों में चरमराती बिजली व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए हैं। विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले ही यह मामला सियासी तूल पकड़ चुका है।

विपक्ष के साथ ही अपनी पार्टी के विधायकों का आरोप झेल रहे ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने कहा है कि वे सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के सुझावों का स्वागत करते हैं और जनता की शिकायतों के समाधान के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे।

दरअसल लखनऊ पूर्व से भाजपा विधायक ओपी श्रीवास्तव ने ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा को पत्र लिखकर अपने क्षेत्र इंदिरा नगर, मुंशीपुलिया, लक्ष्मणपुरी, रवीन्द्रपल्ली, निशातगंज, कल्याणपुर, महानगर, विकास नगर और गोमती नगर समेत कई इलाकों में अघोषित बिजली कटौती से जनता को हो रही परेशानी का मुद्दा उठाया।

इससे पहले सरोजनीनगर विधायक राजेश्वर सिंह और लखनऊ उत्तर के विधायक नीरज बोरा भी अपने क्षेत्रों में बिजली संकट को लेकर मंत्री को पत्र लिख चुके हैं। कुछ दिन पहले ही मंत्री बने ऊंचाहार विधायक मनोज पांडेय ने भी आंधी से क्षतिग्रस्त हुए बिजली तंत्र के कारण आपूर्ति बाधित होने पर चिंता जताई थी।

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने उत्तर प्रदेश बिजली निगम के प्रबंध निदेशक को पत्र लिखकर सिद्धार्थनगर जिले में लम्बी बिजली कटौती की शिकायत की। उन्होंने कहा कि इटवा विधानसभा क्षेत्र के कई इलाकों में बड़े पैमाने पर कटौती की जा रही है और तत्काल आपूर्ति बहाल करने की मांग की।

वहीं बसपा अध्यक्ष मायावती ने सोशल मीडिया पर लिखा कि भीषण गर्मी में कम आपूर्ति और कटौती से गरीब, मध्यम वर्ग, किसान, छोटे व्यापारी और मेहनतकश लोगों का जीवन कष्टदायी हो गया है। उन्होंने सरकार से तत्काल सुधार और नये बिजलीघरों से आपूर्ति बढ़ाने की अपील की।

इधर, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी बिजली की मांग और दाम तो बढ़ रहे हैं, लेकिन आपूर्ति नहीं बढ़ रही। उन्होंने सरकार की नई उत्पादन क्षमता को लेकर योजना पर सवाल उठाए।

इन सबके बीच प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने मांग की कि सरकार 2017 से पहले और अब तक के बिजली उत्पादन का श्वेत पत्र जारी करे। उन्होंने कहा कि जनता को पता चलना चाहिए कि पिछले नौ साल के शासन में भाजपा सरकार ने कितनी नई बिजली उत्पादन क्षमता तंत्र से जोड़ी।

उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि बार-बार खराबी और दोष दुरुस्त करने में देरी से उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ रही है, केवल बिजली की उपलब्धता ही मुद्दा नहीं है।

इन सब आरोपों को लेकर श्री शर्मा ने कहा कि देश और प्रदेश दोनों में बिजली की मांग ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गई है।

श्री शर्मा ने कहा, "समाजवादी दल की सरकार में 2012 से 2017 के बीच प्रदेश में बिजली की औसत मांग करीब 13,000 मेगावाट थी। आज यह 30,000 मेगावाट को पार कर गई है और हम पूरी मांग को पूरा कर रहे हैं। सपा और बसपा शासन में मांग और आपूर्ति में बड़ा अंतर था, जिससे शहर और गांव दोनों में तय और अघोषित कटौती होती थी। तब बिजली को लेकर प्रदर्शन और जनता का गुस्सा आम बात थी।"विपक्ष पर निशाना साधते हुए ऊर्जा मंत्री ने कहा कि बिजली अब सुविधाजनक राजनीतिक मुद्दा बन गई है, लेकिन आलोचक अपने कार्यकाल की स्थिति को नजरअंदाज कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में मांग और आपूर्ति का कोई अंतर नहीं है। अधिकांश व्यवधान स्थानीय खराबी और पारेषण-वितरण तंत्र पर दबाव के कारण हो रहे हैं।

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