नयी दिल्ली , सितम्बर 15 -- उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों ने मंगलवार को यहां ऐतिहासिक किशाऊ परियोजना समझौते पर हस्ताक्षर किए जिससे इन सभी राज्यों को जलापूर्ति में विशेष रूप से फायदा मिलेगा। केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री सी आर पाटिल की उपस्थिति में यहां इस समझौते पर हस्ताक्षर किये गये।

समझौते पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर केन्द्रीय गृह सचिव, केन्द्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग की सचिव और संबंधित राज्यों के मुख्य सचिव भी उपस्थित थे।

श्री शाह ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा," आज हम एक ऐतिहासिक समझौते के साक्षी बने हैं। यह परियोजना पूरी होने के बाद यह घटना इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय बन जाएगी। इस समझौते से हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली किसी-न-किसी रूप में लाभान्वित होंगे।"उन्होंने कहा कि छह राज्यों ने समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं और केन्द्र तथा यमुना बेसिन के इन छह राज्यों के मुख्यमंत्री इस परियोजना को शीघ्र पूर्ण करने के लिए कटिबद्ध हैं।

श्री शाह ने कहा कि इस सरकार के कार्यकाल में यह दसवां जल विवाद समाप्त होने जा रहा है। उनकी सरकार ने बीते पचास वर्षों से चले आ रहे गंभीर विवादों को समाप्त करने का अभियान चला रखा है ।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि किशाऊ परियोजना के बारे में 12 मई 1994 को एक समझौता हुआ था कि बेसिन में आने वाली प्रत्येक भंडारण परियोजना के लिए अलग-अलग समझौते किए जाएंगे। वर्ष 2019 में लखवार और रेणुकाजी परियोजनाओं के विवाद समाप्त होने के बाद किशाऊ का कार्य आगे बढ़ा। बीते 16 जून को इस पर औपचारिक सहमति बनी। जल शक्ति मंत्रालय ने इसे आगे बढ़ाया और सभी राज्यों की सहमति के बाद, तकनीकी एवं आर्थिक पक्षों पर विचार करते हुए तथा सभी राज्यों के हितों की चिंता करते हुए, इसे समाधान तक पहुंचाया गया।

गृह मंत्री ने कहा कि सरकार ने किशाऊ परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया है। इसका लगभग 90 प्रतिशत वित्तीय भार केन्द्र सरकार वहन करेगी और शेष 10 प्रतिशत राशि 1994 के समझौते के अनुसार भागीदार राज्यों द्वारा वहन की जाएगी। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार की कुछ कठिनाइयां थीं। केन्द्र ने उन्हें आश्वस्त किया है कि उनकी मांगों को केन्द्र की योजनाओं के अंतर्गत समाहित करने का प्रयास किया जाएगा और आगे उत्तराखंड पर आने वाले वित्तीय भार के वहन में भी मदद की जाएगी।

श्री शाह ने कहा कि उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर बहने वाली टोंस नदी पर 232.6 मीटर ऊंचा कंक्रीट ग्रेविटी डैम बनेगा, जहां 1.562 अरब घन मीटर जल संग्रहण होगा। इससे 97 हजार हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी और 147.6 करोड़ यूनिट स्वच्छ जलविद्युत भी प्राप्त होगी। उन्होंने कहा कि इसमें सबसे बड़ा लाभ दिल्ली को होगा।

गृह मंत्री ने कहा कि जब यमुना के जल का बंटवारा हुआ, तब नीति-निर्धारकों की ओर से एक गंभीर चूक हुई। यमुना के पर्यावरणीय प्रवाह की गणना ही नहीं की गई और जितना जल उपलब्ध था, वह सब राज्यों के बीच बांट दिया गया। नदी के लिए जल छोड़ा ही नहीं गया। उन्होंने कहा कि किशाऊ परियोजना समझौते से 25 प्रतिशत जल आएगा, वह दिल्ली और यमुना दोनों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा। इससे पर्यावरण संरक्षण भी होगा।

श्री शाह ने कहा कि यमुना के शुद्धिकरण के लिए निरंतर कार्य हो रहा है। यमुना जब स्वच्छ होती है, तो गंगा भी स्वच्छ होती है; क्योंकि अंततः यमुना प्रयागराज में गंगा में ही समाहित होती है। उन्होंने कहा कि जब तक यमुना की स्वच्छता का स्वप्न पूरा नहीं होता, गंगा की स्वच्छता का स्वप्न भी अधूरा रहेगा।

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