जयपुर , अक्टूबर 31 -- रेल संचालन को और अधिक संरक्षित बनाने के लिए किये जा रहे अत्याधुनिक तकनीक के उपयोग के तहत उत्तर पश्चिम रेलवे के जयपुर मंडल के कानौता-बांदीकुई 67 किलोमीटर रेलखंड पर स्टैंडर्ड कवच प्रणाली का सफलतापूर्वक कमीशनिंग किया गया है।
उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी अमित सुदर्शन ने शनिवार को बताया कि उत्तर पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक पंकज शर्मा के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन से यह उत्तर पश्चिम रेलवे के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है जो कानौता-बांदीकुई 67 किलोमीटर रेलखंड उत्तर पश्चिम रेलवे का पहला रेलखंड है जहां स्टैंडर्ड कवच प्रणाली को सफलतापूर्वक कमीशन किया गया है। इस प्रणाली में सात ब्लॉक सेक्शन कानौता-बस्सी, बस्सी-झर, झर-जटवाड़ा, जटवाड़ा-दौसा, दौसा-भांकरी, भांकरी-अरनिया तथा अरनिया-बांदीकुई शामिल हैं।
कवच प्रणाली की फील्ड इंस्टॉलेशन का सत्यापन करने के बाद फील्ड ट्रायल एवं सेट के परीक्षण सफलतापूर्वक किये गये। इस दौरान संरक्षा की दृष्टि से विभिन्न स्थितियों का परीक्षण किया गया। इसके अतिरिक्त, झर-जटवाड़ा रेलखंड में 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक की स्पीड पर तथा कानौता-बस्सी रेलखंड में निर्धारित पूर्ण सेक्शनल गति पर स्पीड टेस्टिंग एवं संबंधित सभी मापदंडो परीक्षण किया गया। उन्होंने बताया कि पहले चरण में 1586 किलोमीटर में इस प्रणाली को कमीशनिंग करने का लक्ष्य हैं और इसमें अब तक 70 प्रतिशत काम हो चुका है और इस वित्त वर्ष में 250 किलोमीटर नेटवर्क में इस कवच प्रणाली को पूरी तरह कमीशनिंग कर देने का प्रयास होगा।
उन्होंने बताया कि स्टैंडर्ड कवच एक आधुनिक ट्रेन संरक्षा प्रणाली है, जिसका उद्देश्य रेल परिचालन के दौरान संरक्षा को और मजबूत करना है। यह प्रणाली निर्धारित परिस्थितियों में संभावित आमने-सामने अथवा पीछे से होने वाली टक्कर के जोखिम को रोकने के लिए आटोमैटिक तरीके से कार्य करती है। इसके अतिरिक्त निर्धारित कवच कार्यप्रणाली के अनुसार आवश्यकता पड़ने पर ओवरस्पीडिंग की स्थिति में स्वचालित ब्रेकिंग सिस्टम कार्य करता है।
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