नयी दिल्ली , जनवरी 11 -- दुनिया के अधिकांश देशों में जहाँ नये साल का जश्न अब थम चुका है, वहीं बर्बर समुदाय (अमाज़ीग) के लोग अपने पारंपरिक नववर्ष (येनयार) की तैयारियां धूमधाम से कर रहे हैं।
गौरतलब है कि उत्तरी अफ्रीका के अल्जीरिया, मोरक्को, ट्यूनीशिया, लीबिया, मिस्र, माली, नाइजर आदि देशों में रहने वाले अमाज़ीग (बर्बर) समुदाय के लोगों का पारंपरिक नववर्ष वर्ष 12 जनवरी को शुरू होता है। यह नववर्ष प्राचीन बर्बर कैलेंडर से संबंधित है, जो जूलियन कैलेंडर पर आधारित है।
बर्बर कैलेंडर की शुरुआत लगभग 950 ईसा पूर्व मानी जाती है, जब बर्बर मूल के राजा शेशनक प्रथम ने मिस्र पर विजय प्राप्त कर शासन संभाला। इस ऐतिहासिक घटना को अमाज़ीग लोग अपने राजनीतिक और सांस्कृतिक गौरव की शुरुआत के रूप में देखते हैं। यह दिन न केवल उनके ऐतिहासिक अस्तित्व और सामूहिक पहचान का प्रतीक है, बल्कि प्रकृति, कृषि और संस्कृति से गहराई से जुड़ा हुआ उत्सव है।
इस दिन को पूरे उत्साह के साथ मनाया जाता है, लोग अपने घरों की साफ-सफाई करते हैं, आपसी मतभेदों को भूलाकर एक-दूसरे से उत्साह से मिलते हैं और जीवन के नये शुरूआत की बधाई देते हैं। इस दिन पारंपरिक भोजन का विशेष महत्व होता है। परिवार एक साथ बैठकर अनाज और सब्ज़ियों से बने व्यंजन खाते हैं, जिनमें कुसकुस सबसे प्रसिद्ध है। कई स्थानों पर भोजन में प्रतीकात्मक रूप से कोई वस्तु छिपाई जाती है, जैसे खजूर या अंडा, जिसे पाने वाले व्यक्ति को आने वाले वर्ष के लिए सौभाग्यशाली माना जाता है।
येनायर के अवसर पर पारंपरिक वेशभूषा, लोकगीत और नृत्य भी देखे जाते हैं। बुज़ुर्ग लोग बच्चों को अपनी पुरानी कथाएँ, इतिहास और नैतिक मूल्य सुनाते हैं, ताकि अगली पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ी रहे।
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