नयी दिल्ली/देहरादून , जून 20 -- उत्तराखण्ड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग को बच्चों के अधिकारों के संरक्षण, संवर्धन तथा बाल हितों से संबंधित नवाचारपूर्ण एवं प्रभावी कार्यों के लिए देश के प्रतिष्ठित स्कॉच गोल्ड अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है।
यह सम्मान आयोग की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना ने शनिवार को नई दिल्ली में आयोजित भव्य समारोह में प्राप्त किया।
इस अवसर पर आयोग द्वारा बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा, बाल संरक्षण तंत्र को सुदृढ़ बनाने, बाल तस्करी, गुमशुदा बच्चों, बाल श्रम, बाल विवाह तथा बच्चों के विरुद्ध हिंसा जैसे विषयों पर किए गए कार्यों एवं अभिनव पहलों की सराहना की गई।
डॉ. गीता खन्ना ने इस सम्मान को उत्तराखण्ड राज्य के समस्त बच्चों, आयोग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों, बाल संरक्षण तंत्र से जुड़े सभी हितधारकों तथा राज्य सरकार के सहयोगात्मक प्रयासों को समर्पित करते हुए कहा कि यह पुरस्कार आयोग को बच्चों के अधिकारों के संरक्षण एवं संवर्धन के क्षेत्र में और अधिक प्रतिबद्धता एवं ऊर्जा के साथ कार्य करने की प्रेरणा प्रदान करेगा।
उन्होंने कहा कि आयोग भविष्य में भी बाल अधिकारों की रक्षा, बच्चों के लिए सुरक्षित एवं सम्मानजनक वातावरण सुनिश्चित करने तथा बाल संरक्षण व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए निरंतर कार्य करता रहेगा। उन्होंने कहा कि यह सम्मान उत्तराखण्ड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के उत्कृष्ट कार्यों की राष्ट्रीय स्तर पर मिली महत्वपूर्ण पहचान है तथा सम्पूर्ण राज्य के लिए गर्व का विषय है।
उल्लेखनीय है कि स्कॉच अवॉर्ड देश के सर्वाधिक प्रतिष्ठित सम्मानों में से एक माना जाता है, जिसे विभिन्न सरकारी संस्थाओं, विभागों एवं संगठनों द्वारा सुशासन, नवाचार, जनकल्याण, डिजिटलाइजेशन, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास एवं सामाजिक क्षेत्र में किए गए उत्कृष्ट कार्यों के मूल्यांकन के उपरांत प्रदान किया जाता है। इस वर्ष विभिन्न राज्यों एवं विभागों द्वारा प्रस्तुत नवाचारों और उत्कृष्ट पहलों में से उत्तराखण्ड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग को गोल्ड कैटेगरी में चयनित किया गया।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित