दावणगेरे , नवंबर 01 -- कर्नाटक के दावणगेरे जिले के त्यावनिगे गांव में हेलीकॉप्टर दुर्घटना में अधिवक्ता सुधीर के निधन की खबर के बाद शोक की लहर फैल गयी। अधिवक्ता सुधीर केवल एक वकील नहीं थे, बल्कि ऐसे व्यक्ति थे, जो गरीब लोगों के लिए न्याय की लड़ाई में हर मुश्किल घड़ी में उनकी मदद करते थे।

उत्तराखंड में हेलीकॉप्टर दुर्घटना में उनकी मौत से परिवार के साथ-साथ पूरे गांव में शोक की लहर है। वह अपने पीछे पत्नी, दो छोटे बच्चों और उन ग्रामीणों को छोड़ गए हैं, जिन्हें वह कानूनी मदद उपलब्ध कराते थे।

चन्नागिरी तालुक के त्यावनिगे गांव के मूल निवासी सुधीर प्रतिष्ठित कोक्कनूर परिवार से ताल्लुक रखते थे। इस परिवार के कई सदस्य डॉक्टर, वकील और न्यायाधीश के रूप में सेवाएं दे चुके हैं। हालांकि, ग्रामीणों के बीच उनकी पहचान परिवार की प्रतिष्ठा से अधिक जरूरतमंदों की मदद करने वाले व्यक्ति के रूप में थी। वह उन लोगों के कानूनी मुकदमों की पैरवी करते थे, जो आर्थिक तंगी के कारण न्याय पाने के लिए बेंगलुरु नहीं जा सकते थे।

उनके रिश्तेदार जगदीश ने बताया, "सुधीर परिवार और गांव के लोगों के बेहद करीब थे। वह उन ग्रामीणों के मुकदमे लड़ते थे, जो बेंगलुरु जाने का खर्च नहीं उठा सकते थे। वह उन्हें न्याय दिलाने में मदद करते थे।"वकालत सुधीर के परिवार की परंपरा भी रही है। उनके पिता मल्लेशप्पा न्यायाधीश रह चुके थे और सुधीर भी उन्हीं के नक्शेकदम पर चलते हुए न्यायाधीश बनने की इच्छा रखते थे।

हालांकि, उत्तराखंड की यात्रा के दौरान उनका यह सफर अचानक समाप्त हो गया। उनके चाचा कृष्णकुमार के अनुसार, सुधीर एक मामले के सिलसिले में उच्चतम न्यायालय गए थे। इसके बाद वह केदारनाथ और बदरीनाथ की तीर्थयात्रा पर निकले थे।

कृष्णकुमार ने बताया, "हमें रात तीन बजे इस हादसे की खबर मिली। इससे हम सभी गहरे सदमे में हैं।" अधिवक्ता सुधीर के परिवार में उनकी पत्नी और दो बच्चे हैं। परिवार इस दुखद घटना से उबरने की कोशिश कर रहा है। उनके पार्थिव शरीर को घर लाने के लिए परिजन उत्तराखंड रवाना हो गए हैं। उनका अंतिम संस्कार कहां किया जाएगा, इस बारे में अभी निर्णय नहीं लिया गया है।

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