नैनीताल , अक्टूबर 15 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने देहरादून कोतवाली में दर्ज 1.28 करोड़ रुपए के विवाद में याचिकाकर्ताओं को अंतरिम राहत देते हुए अगली सुनवाई तक उनके खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक (कोर्सिव) कार्रवाई पर रोक लगा दी है।
न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकल पीठ ने दीपक पोखरियाल एवं अन्य की ओर से दायर याचिका पर बुधवार को सुनवाई करते हुए ये निर्देश दिए।
याचिकाकर्ताओं ने अपने खिलाफ देहरादून में दर्ज़ अभियोग को चुनौती दी है। उनके खिलाफ एफआईआर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज की गई है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि मामला दीवानी प्रकृति का है। उनके अनुसार सात दिसंबर 2024 को शिकायतकर्ता जतिन रावत को साझेदारी फर्म में शामिल किया गया था और उन्होंने फर्म में 1,28,00,000 रुपये लगाए थे।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि साझेदारी फर्म के साथ कारोबार जारी रखने के बजाय "दीपांजलि एसोसिएट" नाम की प्रोपराइटर फर्म में काम शुरू कर दिया गया। उन्होंने कोई कारोबार न होने पर रकम वापस मांगी तो याचिकाकर्ताओं ने पैसे लौटाने से इनकार कर दिया और कथित तौर पर धमकी भी दी।
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि यह विशुद्ध दीवानी विवाद है। शिकायतकर्ता को रकम की वापसी के लिए प्राथमिकी दर्ज करने के बजाय दीवानी वाद दायर करना चाहिए था।
दूसरी ओर शिकायतकर्ता की ओर से कहा गया कि याचिकाकर्ताओं की नीयत शुरू से ही धोखाधड़ी की रही है और उन्होंने पूरी रकम का गबन किया, जिसके कारण एफआईआर दर्ज करानी पड़ी। दोनों पक्षों को सुनने और एफआईआर देखने के बाद कोर्ट ने प्रथम दृष्टया माना कि मामला स्पष्ट रूप से दीवानी प्रकृति का प्रतीत होता है, जिसमें प्राथमिकी दर्ज नहीं की जानी चाहिए थी। न्यायालय ने कहा कि शिकायतकर्ता के पास दीवानी मुकदमे के जरिए रकम वापस पाने का पर्याप्त अवसर है।
न्यायालय ने प्रतिवादियों को छह सप्ताह में जवाबी हलफनामा दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई आगामी 23 दिसंबर को होगी।
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