नैनीताल , फरवरी 25 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने केदारनाथ, यमुनोत्री, हेमकुंड साहिब और आदि कैलाश यात्रा के दौरान घोड़े-खच्चरों पर होने वाली क्रूरता और मौत के मामले में याचिकाकर्ता से 16 मार्च तक महत्वपूर्ण सुझाव पेश करने को कहा है।
मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की पीठ ने बुधवार को समाज सेवी गौरी मौलखी और दिल्ली निवासी अजय गौतम की ओर से दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई की।
याचिकाकर्ता गौरी मौलेखी ने कहा कि केदारनाथ, यमुनोत्री, हेमकुंड साहिब और आदि कैलाश यात्रा मार्ग पर घोड़े खच्चरों के साथ क्रूरता की घटना सामने आई हैं।बीमार घोड़ों के उपचार और जांच की उचित व्यवस्था नहीं है। यहां तक कि घोड़ों में फैलने वाली इंफुलेइंजा और ग्लैंडर्स जैसी संक्रामक बीमारियों की जांच और बचाव के लिए भी सरकार की ओर से कोई उचित उपाय नहीं किए जाते हैं। इन गंभीर बीमारियों से घोड़ों की मौत हो जाती है। पिछली बार इन्फ्लुएन्जा के 680 मामले सामने आए थे। यात्रा मार्ग पर दो घोड़ों के कंकाल बरामद हुए थे। यात्रा मार्ग पर स्वच्छता का भी विशेष ध्यान नहीं रखा जाता है। जगह जगह घोड़ों का मल बिखरा रहता है जिससे स्थानीय नदियां प्रदूषित हो रही हैं।
याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि एसओपी का अनुपालन नहीं किया जाता है। उन्होंने मांग की कि सचिव की निगरानी में एक कमेटी का गठन किया जाए और कमेटी उचित निगरानी रखें।
प्रदेश सरकार की ओर से कहा गया कि सरकार ने चारधाम यात्रा के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की है। उसी के तहत उचित कदम उठाए जाते हैं। यात्रा मार्ग पर पशु चिकित्सकों की तैनाती रहती है। घोड़ों के ठहरने के लिए कई जगह पड़ाव बनाए गए हैं। उन्हें गरम पानी मुहैया कराया जाता है।
पीठ ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिए कि वह महत्वपूर्ण सुझावों की लिखित प्रति न्यायालय के समक्ष पेश करें। पीठ चारधाम यात्रा से पहले इस संबंध में उचित निर्णय जारी करेगी। इस मामले में अगली सुनवाई 16 मार्च को होगी।
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