नैनीताल , अप्रैल 23 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने गैंगस्टर एक्ट के एक पुराने मामले में महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए दो व्यक्तियों की दोषसिद्धि और सजा को रद्द कर दिया है। न्यायमूर्ति आशीष नैथानी की एकल पीठ ने नैनीताल जिले के हेमू पंत उर्फ हेमू कालू और मनीष उर्फ कंचू मटियानी द्वारा दायर आपराधिक अपील पर गुरुवार को सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। न्यायालय ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट की आवश्यक शर्तों को साबित करने में विफल रहा है।
मामले के अनुसार विशेष न्यायाधीश (गैंगस्टर एक्ट) नैनीताल ने 19 अगस्त, 2013 को उक्त दोनों को गैंगस्टर के तहत दोषी ठहराते हुए उन्हें तीन साल के कठोर कारावास और 10,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी।
सुनवाई के दौरान अपीलकर्ताओं की ओर से उनके अधिवक्ता ने तर्क दिया कि पूरा मामला केवल पुलिस द्वारा तैयार किए गए गैंग चार्ट और पुराने आपराधिक इतिहास पर आधारित था।
उच्च न्यायालय ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए स्पष्ट किया कि केवल पिछले मामलों के पंजीकरण और आपराधिक पृष्ठभूमि होना ही गैंगस्टर एक्ट के तहत सजा का आधार नहीं हो सकता। अदालत ने कहा कि जब तक यह साबित न हो कि आरोपी किसी संगठित गिरोह के रूप में निरंतर गैर-कानूनी गतिविधियों में शामिल था तब तक उन्हें दोषी नहीं माना जा सकता।
अभियोजन पक्ष का पूरा मामला केवल पुलिस अधिकारियों की गवाही पर टिका था। किसी भी स्वतंत्र सार्वजनिक गवाह का परीक्षण नहीं किया गया था। इसके अलावा सह-आरोपियों की रिहाई भी उनके बरी होने का आधार बनी।
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