नैनीताल , अक्टूबर 08 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता गुरुवार को सेवानिवृत्त हो गए। उनके सम्मान में फुल कोर्ट रेफरेंस (विदाई समारोह) आयोजित किया गया।
इस अवसर पर अपने संबोधन में मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि लगभग नौ माह के सीमित कार्यकाल में उन्हें उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश का दायित्व निभाने का सौभाग्य मिला। उन्होंने कहा कि यहां उन्हें जो स्नेह मिला, उसे शब्दों में बयां करना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि नैनीताल ऐसा शहर है जो अपने आप में सुकून देता है। बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं से मिले अपार स्नेह के लिए उन्होंने आभार जताया।
मुख्य न्यायाधीश ने उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की कमी पर चिंता जताई और कहा कि स्वीकृत 11 पदों के सापेक्ष यह संख्या पूरी नहीं हो सकी। उन्होंने बताया कि इसे पूरा करने के लिए उनकी ओर से सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार इस पर शीघ्र निर्णय लेगी और कोरम पूरा होने से प्रदेश की जनता को न्याय मिल सकेगा।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी और महाधिवक्ता एसएन बाबुलकर ने भी अपने उद्बोधन में मुख्य न्यायाधीश के कार्यकाल को महत्वपूर्ण बताया। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि मुख्य न्यायाधीश के सीमित कार्यकाल से मिले ज्ञान से उन्हें और अधिवक्ताओं को नई प्रेरणा मिलेगी।
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष डीसीएस रावत ने कहा कि मुख्य न्यायाधीश के कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां रहीं, जिनमें सबसे बड़ी उपलब्धि न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने के प्रयास हैं। उन्होंने कहा कि न्यायाधीशों की कमी दूर होने पर प्रदेश के लोगों को सुलभ, सस्ता और शीघ्र न्याय मिल सकेगा।
इस मौके पर उच्च न्यायालय के सभी न्यायाधीश, अवकाश प्राप्त न्यायमूर्ति जेसीएस रावत, मेघालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश बीके बिष्ट, रजिस्ट्रार जनरल, उजाला के निदेशक, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिकारी, राज्य सरकार के वरिष्ठ पदों पर आसीन अधिवक्ता और एसएसपी नैनीताल मौजूद रहे।
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