देहरादून , मई 26 -- उत्तराखंड सरकार ने राष्ट्रीय खेल 2025 के लिए तैयार की गई विश्वस्तरीय खेल सुविधाओं को अब खिलाड़ियों और आम खेल प्रेमियों के लिए ''पे एंड प्ले'' व्यवस्था के तहत खोलने का फैसला किया है।

खेल विभाग द्वारा जारी शासनादेश के अनुसार प्रदेश के विभिन्न स्टेडियमों, खेल मैदानों और आधुनिक उपकरणों का उपयोग अब निर्धारित शुल्क देकर नियमित अभ्यास और प्रशिक्षण के लिए किया जा सकेगा। इस व्यवस्था से जहां खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं मिलेंगी, वहीं खेल विभाग को भी नियमित राजस्व प्राप्त होगा, जिसे खेल विकास निधि में जमा किया जाएगा।

प्रदेश की खेल मंत्री रेखा आर्या ने मंगलवार को बताया कि उत्तराखंड ने राष्ट्रीय खेलों के दौरान विश्वस्तरीय खेल अवस्थापना तैयार की थी और अब सरकार चाहती है कि इन संसाधनों का अधिकतम उपयोग प्रदेश के खिलाड़ियों के हित में हो। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य खेल सुविधाओं को केवल प्रतियोगिताओं तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उन्हें खिलाड़ियों के नियमित प्रशिक्षण और प्रतिभा निखारने का केंद्र बनाना है।

श्रीमती आर्या ने बताया कि नई व्यवस्था के तहत देहरादून स्थित रजत जयंती खेल परिसर, महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज और परेड ग्राउंड सहित विभिन्न खेल परिसरों में एथलेटिक्स, शूटिंग, स्क्वैश, इक्वेस्ट्रियन, आइस स्पोर्ट्स, क्रिकेट, बॉलिंग, फेंसिंग, जिम्नास्टिक, लॉन टेनिस, पिकलबॉल, बैडमिंटन, टेबल टेनिस, फुटबॉल, स्विमिंग, हैंडबॉल और हॉकी जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

जारी शासनादेश में कई खेलों के लिए प्रति घंटा किराया और मासिक सदस्यता शुल्क भी तय किया गया है। उदाहरण के तौर पर शूटिंग के लिए प्रति व्यक्ति 250 रुपये प्रति घंटा और 5000 रुपये मासिक सदस्यता शुल्क निर्धारित किया गया है, जबकि स्क्वैश कोर्ट के लिए 300 रुपये प्रति घंटा और 6000 रुपये मासिक शुल्क तय किया गया है। बैडमिंटन कोर्ट, टेबल टेनिस, जिम्नास्टिक और अन्य खेलों के लिए भी अलग-अलग दरें निर्धारित की गई हैं। खिलाड़ियों को इन सुविधाओं के साथ चेंजिंग रूम, वॉशरूम, सिंथेटिक ट्रैक, स्विमिंग लेन, कोचिंग सहायता और आधुनिक उपकरणों का लाभ भी मिलेगा।

खेल मंत्री ने बताया कि यह व्यवस्था खिलाड़ियों के लिए बेहद लाभकारी साबित होगी, क्योंकि अब उन्हें उच्चस्तरीय प्रशिक्षण के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा प्राप्त होने वाली आय का उपयोग खेल परिसरों के रखरखाव, उपकरणों के उन्नयन और नई सुविधाओं के विकास में किया जाएगा।

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