नैनीताल , अप्रैल 04 -- उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय में शनिवार को "शैक्षिक समझौता एवं विचार गोष्ठी" का आयोजन किया गया। इस दौरान कुमाऊनी और बुंदेली भाषा, संस्कृति एवं शोध के विभिन्न आयामों पर विस्तृत चर्चा हुई। कार्यक्रम में बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के साथ शैक्षिक सहयोग को मजबूत करने के लिए औपचारिक समझौता ज्ञापन (एमओयू) का आदान-प्रदान भी किया गया।

कार्यक्रम में कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी ने कहा कि बोली-भाषा के लोगों में आपसी मित्रता और संवाद से ही भारतीय भाषाओं को वैश्विक पहचान मिल सकती है। उन्होंने विश्वविद्यालयों की भूमिका को लोक और शास्त्र के बीच सेतु बताते हुए कहा कि क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन में ऐसे प्रयास बेहद महत्वपूर्ण हैं।

जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने अपने संबोधन में कहा कि क्षेत्रीय बोलियां आपस में गहराई से जुड़ी होती हैं और इनमें पारंपरिक ज्ञान का अपार भंडार होता है। उन्होंने ज्ञान चतुर्वेदी और शेर दा अनपढ़ की रचनाओं का उल्लेख करते हुए कुमाऊनी और बुंदेली संस्कृति की समृद्धि को रेखांकित किया।

मानविकी विद्याशाखा के निदेशक प्रो. गिरिजा प्रसाद पांडे ने कहा कि कुमाऊनी और बुंदेली जैसी लोकभाषाएं समाज की संवेदनाओं को व्यक्त करती हैं और इन्हें अकादमिक विमर्श में स्थान देना समय की मांग है। वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. दिवा भट्ट ने कुमाऊनी और बुंदेली को "भगिनी भाषाएं" बताते हुए इनके संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया।

कार्यक्रम में डॉ. सुनीता वर्मा और डॉ. सुधा दीक्षित ने बुंदेली भाषा को लोक संस्कृति का जीवंत दस्तावेज बताते हुए तुलनात्मक अध्ययन की आवश्यकता बताई। विशिष्ट अतिथि प्रो. पुनीत बिसारिया ने कहा कि यह समझौता शोध, पाठ्यक्रम विकास और शैक्षणिक आदान-प्रदान के नए अवसर खोलेगा।

मुख्य अतिथि प्रो. सविता मोहन ने कहा कि शिक्षा प्रणाली में क्षेत्रीय भाषाओं को उचित स्थान दिए बिना सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव संभव नहीं है। उन्होंने वृन्दावनलाल वर्मा और मैत्रेयी पुष्पा के साहित्य का उल्लेख करते हुए बुंदेलखंड की समृद्ध साहित्यिक परंपरा पर प्रकाश डाला।

इस अवसर पर बहुभाषिक त्रैमासिक पत्रिका 'ज्ञानगृह' के प्रवेशांक का लोकार्पण भी किया गया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में छात्रों ने बुंदेली और कुमाऊनी लोकगीत, नृत्य और कविताओं की प्रस्तुति देकर समां बांधा।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. अनिल कार्की ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन कुलसचिव खेमराज भट्ट ने दिया। उन्होंने कहा कि यह पहल दोनों विश्वविद्यालयों के बीच दीर्घकालिक शैक्षिक संबंधों की मजबूत नींव रखेगी।

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