देहरादून , अक्टूबर 23 -- केंद्र सरकार ने उत्तराखंड राज्य में वित्तीय पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और सेवा वितरण में सुधार के लिए एक परियोजना को विश्व बैंक के विचारार्थ अनुशंसित किया है जिसके तहत विश्व बैंक से लगभग 680 करोड़ (लगभग आठ करोड़ अमेरिकी डॉलर) की बाह्य सहायता का मिल सकती है। इसका प्रस्ताव राज्य सरकार ने प्रस्तुत किया था जिसे केंद्र सरकार ने अनुशंसित किया है।

गुरुवार को आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि इस परियोजना के अंतर्गत उत्तराखंड सरकार ने राज्य में सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली को और अधिक सक्षम, पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाने तथा सेवा प्रदाय व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से विश्व बैंक से बाह्य सहायता का प्रस्ताव प्रस्तुत किया था। केन्द्रीय वित्त मंत्रालय द्वारा इस प्रस्ताव को विश्व बैंक भारत कार्यालय, नयी दिल्ली के कार्यवाहक कंट्री डायरेक्टर पॉल प्रूसी को औपचारिक रूप से प्रेषित किया गया है। इस पत्र में यह स्पष्ट किया गया है कि उत्तराखंड सरकार के इस प्रस्ताव की प्रति संलग्न करते हुए इसे विचार एवं स्वीकृति के लिए अनुशंसित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस अनुशंसा पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा, "यह उत्तराखंड के वित्तीय सुधार और सुशासन के प्रयासों की बड़ी स्वीकृति है। राज्य सरकार निरंतर प्रयासरत है कि प्रत्येक सरकारी रुपया जनता के हित में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व के साथ व्यय हो। विश्व बैंक की यह संभावित सहायता राज्य की वित्तीय प्रणालियों को डिजिटल, सुदृढ़ और परिणामोन्मुख बनाएगी।"श्री धामी ने कहा कि इस परियोजना से राज्य में राजकोषीय अनुशासन, वित्तीय डेटा पारदर्शिता, और सेवा प्रदाय तंत्र की गुणवत्ता में अभूतपूर्व सुधार आएगा।

उत्तराखंड सरकार के वित्त विभाग के अनुसार, यह परियोजना राज्य की ई-गवर्नेंस और डिजिटल पब्लिक फाइनेंस मैनेजमेंट को नई दिशा देगी। इससे राज्य के प्रत्येक विभाग में वित्तीय अनुशासन, रियल-टाइम मॉनिटरिंग और रिपोर्टिंग प्रणाली को मजबूत किया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि यह पहल उत्तराखंड को एक वित्तीय रूप से सुदृढ़, पारदर्शी और उत्तरदायी राज्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम सिद्ध होगी। केंद्र सरकार एवं विश्व बैंक के सहयोग से राज्य की वित्तीय प्रशासनिक संरचना को सशक्त बनाने के साथ-साथ नागरिकों तक सरकारी सेवाओं की प्रभावी डिलीवरी सुनिश्चित की जाएगी।

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