देहरादून , सितंबर 14 -- उत्तराखंड के राज्यपाल और सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह मंगलवार 15 सितंबर को राज्य के राज्यपाल के पद पर पांच वर्ष पूरा कर रहे हैं। वह राज्य के पहले राज्यपाल हैं जिन्होंने सर्वाधिक लम्बे समय यह संवैधानिक दायित्व संभाला है।
15 सितम्बर, 2021 को राज्यपाल पद का दायित्व संभालने के बाद से उन्होंने प्रदेश के विकास और जनकल्याण को केंद्र में रखते हुए अनेक महत्वपूर्ण पहल की हैं। उन्होंने अपने कार्यकाल की शुरुआत में रिवर्स पलायन, महिला सशक्तीकरण एवं बालिका शिक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं तकनीक, जैविक एवं प्राकृतिक कृषि तथा वेलनेस को पांच प्रमुख मिशन के रूप में निर्धारित किया। पिछले पांच वर्षों में इन प्राथमिकताओं को शिक्षा, शोध, तकनीक, स्वास्थ्य, युवा, महिला सशक्तीकरण और जनभागीदारी से जोड़ते हुए अनेक अभिनव प्रयास किए गए हैं।
राज्यपाल ने कुलाधिपति के रूप में उच्च शिक्षा में गुणवत्ता, पारदर्शिता, शोध और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए 'वन यूनिवर्सिटी-वन रिसर्च' जैसी पहल शुरू की और शोध को केवल अकादमिक गतिविधि तक सीमित न रखते हुए उसे धरातल पर लागू करने पर विशेष जोर दिया। उच्च शिक्षा की व्यवस्थाओं में पारदर्शिता और तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए उत्तराखण्ड कॉलेज संबद्धता पोर्टल विकसित किया गया। इससे महाविद्यालयों और संस्थानों की संबद्धता प्रक्रिया ऑनलाइन और समयबद्ध हुई। कुलपति चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता के लिए बातचीत की वीडियो रिकॉर्डिंग शुरू की गई। उन्होंने विश्वविद्यालयों के बीच बेहतर संवाद और उपलब्धियों के आदान-प्रदान के लिए 'यूनिवर्सिटी कनेक्ट उत्तराखण्ड' तथा निजी विश्वविद्यालयों के लिए 'यूनिसंगम' मोबाइल एप शुरू किए गए।
राज्यपाल श्री सिंह ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को राज्य के विकास का महत्वपूर्ण माध्यम माना और इसे लोक भवन की कार्यप्रणाली से लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और सामाजिक क्षेत्र तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास किए। उन्होंने लोक भवन में एआई आधारित स्मार्ट ऑटोमेशन प्रणाली, ई-पास, ऑनलाइन प्रबंधन प्रणाली, लाइब्रेरी प्रबंधन प्रणाली, डिजिटल डैशबोर्ड और ई-ऑफिस जैसी व्यवस्थाएं विकसित की गईं।
श्री सिंह के प्रयासों से लोक भवन, देहरादून और नैनीताल की परिसंपत्तियों में पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए इन्वेंटरी प्रबंधन प्रणाली विकसित किया गया तथा सामग्री पर बार कोड लगाए गए। 'गार्गी नारी शक्ति' एआई चैटबॉट महिलाओं को कानूनी सहायता, करियर, वित्तीय साक्षरता, सुरक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराने की दिशा में अभिनव प्रयास है। वहीं 'इटरनल गुरु' एआई चैटबॉट के माध्यम से श्री गुरु ग्रंथ साहिब की शिक्षाओं और गुरबाणी के आध्यात्मिक संदेश को तकनीक के माध्यम से लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया। एआई को बढ़ावा देने के क्रम में 'ऑपरेशन साथी', 'आरोही इन्क्यूबेटर' और एआई थीम रुम की शुरुआत की गई। ऑपरेशन साथी के माध्यम से प्रदेश के सभी 13 जिलों में विद्यार्थियों, युवाओं, शोधकर्ताओं, महिला उद्यमियों, किसानों, स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय नवप्रवर्तकों की प्रतिभा एवं विचारों की पहचान की जा रही है। आरोही इन्क्यूबेटर इन विचारों को मार्गदर्शन, शोध, निवेश और स्टार्टअप के अवसरों से जोड़ने का माध्यम बन रहा है। एआई थीम रुम के माध्यम से एआई और तकनीकी नवाचारों को जन-जन से जोड़ने की कवायद की जा रही है।
राज्यपाल श्री सिंह ने अपने पांच वर्षों के कार्यकाल में प्रदेश के सभी जिलों का कई बार दौरा कर अधिकारियों के साथ बैठक और स्थानीय लोगों से संवाद किया। सीमांत क्षेत्रों और वाइब्रेंट विलेज पर विशेष ध्यान देते हुए उन्होंने 51 में से 30 गांवों का दौरा किया। इन क्षेत्रों में स्थानीय लोगों, युवाओं और पूर्व सैनिकों से संवाद कर उनकी आवश्यकताओं और संभावनाओं को समझने का प्रयास किया गया। महिला सशक्तीकरण और बालिका शिक्षा राज्यपाल की प्राथमिकताओं में लगातार प्रमुख रहे हैं। लोक भवन परिसर में बालिका आत्मरक्षा एवं कंप्यूटर प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना इसी दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। एआई आधारित 'गार्गी नारी शक्ति' पहल इसी प्रयास को तकनीक से जोड़ती है। उन्होंने टीबी मुक्त भारत अभियान में सक्रिय भूमिका निभाते हुए स्वयं भी निक्षय मित्र बनकर टीबी मरीजों की सहायता की। उनके मार्गदर्शन में बड़ी संख्या में निक्षय मित्रों को इस अभियान से जोड़ा। स्वयं राज्यपाल ने 93 टीबी रोगियों के निक्षय मित्र बनकर उनकी मदद की है। वेलनेस की दिशा में लोक भवन परिसर में आरोग्य धाम की स्थापना की गई, जहां पंचकर्म, मर्म चिकित्सा और फिजियोथेरेपी जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक के समन्वय से स्वास्थ्य एवं वेलनेस को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया।
इसके अलावा, राज्यपाल ने पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए लोक भवन परिसर में वर्षा जल संचयन सहित विभिन्न प्रयास किए गए। हरियाली बढ़ाने के साथ जल संरक्षण के प्रति जनजागरूकता का संदेश भी दिया गया। लोक भवन परिसर में बहुउद्देशीय भवनों के निर्माण की नींव सुगम एवं प्रभावी कार्यप्रणाली की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। आधुनिक सुविधाओं से युक्त इन ग्रीन बिल्डिंग्स का निर्माण पर्यावरण संरक्षण और पारंपरिक पहाड़ी वास्तुकला को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है। आध्यात्मिक, प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत को जोड़ते हुए 'नक्षत्र वाटिका' की स्थापना की गई, जिसमें 27 नक्षत्रों से संबंधित 27 पौधों को स्थान दिया गया है। लोक भवन के बोनसाई गार्डन का भी विस्तार किया गया। गौशाला की स्थापना के साथ भारतीय संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण के मूल्यों को भी परिसर से जोड़ा गया है। पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों की समस्याओं के समाधान के लिए लोक भवन में शिकायत निवारण अधिकारी की व्यवस्था की गई। समय-समय पर जनता मिलन कार्यक्रम आयोजित कर राज्यपाल ने स्वयं लोगों की समस्याएं सुनीं और संबंधित अधिकारियों को उनके समाधान के निर्देश दिए। लोक भवन में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए नियमित परिवार मिलन कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिसमें उनकी व्यक्तिगत एवं कार्यालयी समस्याओं को सुना गया और उत्कृष्ट कार्य करने वाले कार्मिकों को सम्मानित किया गया। इससे संस्थान में टीम भावना को मजबूत करने का प्रयास हुआ।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित