नैनीताल , फरवरी 16 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने सोमवार को देहरादून के रिस्पना और बिंदाल एलीवेटेड परियोजना को चुनौती देने वाली जनहित याचिका को असामयिक मानते हुए खारिज कर दिया। हालांकि अदालत ने याचिकाकर्ता को सक्षम प्राधिकारी के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज करने के लिए कहा है।
देहरादून के खुर्शीद अहमद की ओर से दायर जनहित याचिका पर मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में सुनवाई हुई।
याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि सरकार यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए देहरादून में रिस्पना और बिंदास नदियों पर एलीवेटेड रोड का निर्माण कर रही है। इससे 27 गांव प्रभावित हो रहे हैं। इन गांवों की भूमि अधिग्रहित की जा रही है।
इस परियोजना के निर्माण से पूर्व पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन और भूकंपीय भू तकनीकी अध्ययन नहीं किया गया है, इससे इन गांवों को नुक़सान हो सकता है।
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