नैनीताल , मई 13 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने चंपावत जिले के बनबसा में उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की भूमि से अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिया है। उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव को छह सप्ताह में पूरी प्रक्रिया संपन्न करने का निर्देश दिया गया है।

मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में बुधवार को बहादुर सिंह की पाटनी की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान ये निर्देश जारी किया।

याचिकाकर्ता के अनुसार, उच्च न्यायालय ने वर्ष 2023 में उप्र के सिंचाई विभाग को अतिक्रममित भूमि पर काबिज लोगों को चिन्हित करने, काबिज लोगों के दावे सुनने और अतिक्रमणकारियों को हटाने के निर्देश दिये थे लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गयी।

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से सरकारी अधिवक्ता आरडी पालीवाल ने बताया कि उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में कुल 488 अतिक्रमणकारी चिन्हित किये गये। इनमें से 174 लोगों के पास कोई दस्तावेज नहीं पाये गये।

वर्ष 2024 में चंपावत जिला प्रशासन से 174 अतिक्रमणकारियों को हटाये जाने के लिये आवश्यक सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की गयी लेकिन चंपावत जिला प्रशासन ने कोई कदम नहीं उठाया।

इसके बाद अदालत ने उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के प्रमुख सचिव को अतिक्रमणकारियों के खिलाफ पुनः आवश्यक कदम उठाने और चंपावत जिला प्रशासन को उप्र सिंचाई विभाग को आवश्यक सुरक्षा मुहैया कराने के निर्देश दिये हैं।

इस कार्रवाई के लिये अदालत ने उत्तर प्रदेश सिंचाई महकमे को छह सप्ताह का समय दिया है। खंडपीठ इस मामले में छह सप्ताह बाद सुनवाई करेगी।

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