नयी दिल्ली , जुलाई 15 -- उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को उत्तराखंड उच्च न्यायालय को नैनीताल से हल्द्वानी स्थानांतरित करने का रास्ता साफ कर दिया। न्यायालय ने उच्च न्यायालय के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें वकीलों और वादियों के बीच जनमत संग्रह कराने का निर्देश दिया गया था ताकि यह तय किया जा सके कि उच्च न्यायालय को स्थानांतरित किया जाना चाहिए या नहीं।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने वर्ष 2024 के उच्च न्यायालय के जनमत संग्रह के निर्देश को दरकिनार करते हुए टिप्पणी की कि उच्च न्यायालय को 'ऐसे आदेश पारित करने का कोई अधिकार नहीं था'। इस मुद्दे को राज्य सरकार के साथ परामर्श करके प्रशासनिक पक्ष पर सुलझाया जाना चाहिए था।
उच्चतम न्यायालय ने मई 2024 में ही जनमत संग्रह कराने के उच्च न्यायालय के निर्देश पर रोक लगा दी थी। हालांकि आज न्यायालय ने उस आदेश को रद्द कर दिया।
पीठ ने कहा कि उत्तराखंड सरकार ने नए उच्च न्यायालय परिसर के निर्माण के लिए हल्द्वानी में पहले ही भूमि चिन्हित कर ली है। यह भूमि उच्च न्यायालय को सौंप दी जाए और सभी आवश्यक वैधानिक स्वीकृतियां छह सप्ताह के भीतर प्रदान की जाएं।
उच्च न्यायालय ने नैनीताल में वकालत करने वाले उन वकीलों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए जनमत संग्रह का आदेश दिया था, जो उच्च न्यायालय को हल्द्वानी स्थानांतरित करने के प्रस्ताव का विरोध कर रहे थे। जनमत संग्रह कराने के इस निर्देश को बाद में उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन द्वारा उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी गयी थी।
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