भुवनेश्वर , जुलाई 31 -- उड़ीसा उच्च न्यायालय ने कटक के 63 वर्षीय एकव्यक्ति की फर्जी गैर-जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) के आधार पर हुई गैर-कानूनी गिरफ्तारी की अलग-अलग जांच के आदेश दिये हैं।
न्यायमूर्ति आर.के. पटनायक ने कहा कि दस्तावेजों में मौजूद सबूतों से प्रथम दृष्टया यह साबित होता है कि याचिकाकर्ता को गैर-कानूनी तरीके से गिरफ्तार और हिरासत में रखा गया था।
इसके साथ ही अदालत ने याचिकाकर्ता को अंतरिम मुआवज़े के तौर पर 30 हजार रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया है।
अदालत ने मुआवज़े का भुगतान तुरंत करने का निर्देश दिया और कहा कि जांच पूरी होने के बाद दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों या अदालत के कर्मचारियों से यह राशि वसूल की जायेगी। ।
याचिका के अनुसार, इस वरिष्ठ नागरिक को लालबाग पुलिस ने भुवनेश्वर के एसडीजेएम कोर्ट द्वारा कथित तौर पर जारी एनबीबडब्ल्यू के आधार पर गिरफ्तार किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि नकली वारंट के आधार पर उन्हें हिरासत में लिया गया, उनके साथ मारपीट की गयी और उन्हें अदालत के सामने पेश किया गया।
कार्यवाही के दौरान, उच्च न्यायालय ने लालबाग पुलिस स्टेशन के प्रभारी निरीक्षक और भुवनेश्वर के एसडीजेएम से रिपोर्ट मंगायी। एसडीजेएम की रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया कि याचिकाकर्ता के विरुद्ध 20 नवंबर, 2024 की ऐसी कोई गैर-जमानती वारंट जारी नहीं की गयी थी और वह संबंधित आपराधिक मामले में न तो आरोपी था और न ही मुखबिर।
मामले को गंभीर चूक बताते हुए न्यायालय ने कहा कि जाली वारंट के कारण एक निर्दोष नागरिक की गैरकानूनी गिरफ्तारी हुई।
न्यायालय ने भुवनेश्वर के एसडीजेएम को निर्देश दिया कि वे उन परिस्थितियों की जांच करें जिनके तहत जाली वारंट अस्तित्व में आया, साथ ही पुलिस उपायुक्त (कटक शहरी) को निर्देश दिया कि वे इस बात की गहन जांच करें कि लालबाग पुलिस ने वारंट की प्रामाणिकता की पुष्टि किए बिना गिरफ्तारी कैसे की।
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