उज्जैन , अप्रैल 2 -- मध्यप्रदेश की धार्मिक एवं प्राचीन नगरी उज्जैन में 3 से 5 अप्रैल तक आयोजित होने वाले "महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम" अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक अंतरिक्ष विज्ञान के समन्वय पर वैश्विक स्तर पर मंथन होगा।
मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के महानिदेशक अनिल कोठारी ने बताया कि उज्जैन प्राचीन काल से समय गणना और खगोल विज्ञान का वैश्विक केंद्र रहा है और यह सम्मेलन एक बार फिर इसे अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक संगम का केंद्र बनाएगा। सम्मेलन का आयोजन उज्जैन के समीप डोंगला में किया जाएगा, जबकि उद्घाटन उज्जैन स्थित तारामंडल परिसर में होगा।
कार्यक्रम में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। विशिष्ट अतिथियों में केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत, इसरो के अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन तथा विचारक सुरेश सोनी शामिल रहेंगे।
यह तीन दिवसीय सम्मेलन मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ (शिक्षा मंत्रालय), विज्ञान भारती के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। सह-आयोजक संस्थाओं में भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान इंदौर, वीर भारत न्यास और दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान शामिल हैं।
सम्मेलन में देश-विदेश के वैज्ञानिक, खगोलविद, शिक्षाविद और शोधार्थी भाग लेंगे। तकनीकी सत्रों में डॉ. वी. के. सारस्वत, प्रो. यासुहाइड होबारा, डॉ. निलेश देसाई, डॉ. प्रकाश चौहान, अन्नपूर्णी सुब्रमण्यम सहित कई विशेषज्ञ अपने विचार रखेंगे।
उल्लेखनीय है कि उज्जैन प्राचीन काल में खगोल विज्ञान का प्रमुख केंद्र रहा है, जहां आचार्य वराहमिहिर ने खगोलीय गणनाओं का आधार विकसित किया था। डोंगला, जो कर्क रेखा पर स्थित है, काल गणना के लिए ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। सम्मेलन में उज्जैन-डोंगला को वैश्विक मध्यान रेखा के रूप में स्थापित करने की संभावनाओं पर भी विचार किया जाएगा। सम्मेलन का समापन 5 अप्रैल को होगा, जिसमें प्राप्त सुझावों के आधार पर भविष्य की कार्ययोजना तय की जाएगी।
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