नयी दिल्ली , मई 08 -- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उच्च हिमालयी क्षेत्र में सक्रिय बचाव संगठन तिरंगा माउंटेन रेस्क्यू की दस वर्षों की समर्पित सेवा के उपलक्ष्य में आयोजित फोटो प्रदर्शनी का शुक्रवार को यहां अवलोकन किया।

मानेकशॉ सेंटर में आयोजित 'राष्ट्र की निःशब्द सेवा का एक दशक' शीर्षक की इस प्रदर्शनी में देश के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में किए गए बचाव अभियानों की प्रभावशाली तस्वीरें प्रदर्शित की गईं, जिनमें संगठन के स्वयंसेवकों की दृढ़ता और उनके प्रयासों से प्रभावित लोगों के जीवन को दर्शाया गया।

श्री सिंह ने अत्यंत कठिन पर्वतीय क्षेत्रों में तिरंगा माउंटेन रेस्क्यू द्वारा प्रदर्शित साहस, अनुशासन और निस्वार्थ सेवा की सराहना की। उन्होंने कहा, "हमारे सैनिक सीमाओं की रक्षा करते हुए अतुलनीय कठिनाइयों का सामना करते हैं। कई बार प्रकृति स्वयं उनके विरुद्ध खड़ी हो जाती है। ऐसे समय में यही पर्वतीय बचावकर्मी अपने प्राणों की परवाह किए बिना उन्हें सुरक्षित स्थान तक पहुँचाते हैं। वे न केवल सैनिकों का मनोबल बढ़ाते हैं, बल्कि पर्वतीय क्षेत्रों के निवासियों को यह भरोसा भी दिलाते हैं कि वे अकेले नहीं हैं। उनका निःशब्द किंतु प्रभावशाली कार्य भारत की वास्तविक भावना को प्रतिबिंबित करता है।"उन्होंने कहा कि मशीनें सहायता प्रदान कर सकती हैं और प्रणालियाँ समर्थन दे सकती हैं, लेकिन किसी जीवन को बचाने के लिए आगे बढ़ने का वास्तविक साहस और कर्तव्यबोध व्यक्ति में ही होता है। तिरंगा माउंटेन रेस्क्यू ने बार-बार यह सिद्ध किया है कि वे इसी भावना के वास्तविक संरक्षक हैं। संगठन केवल बचाव कार्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से सीमा स्थिरता, सामुदायिक विश्वास और राष्ट्रीय दृढ़ता को भी सुदृढ़ कर रहा है।

संगठन के संस्थापक हेमंत सचदेव ने कहा कि यह प्रदर्शनी केवल संगठन की यात्रा का प्रतिबिंब नहीं, बल्कि उन सभी स्वयंसेवकों को श्रद्धांजलि है जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में साहसपूर्वक कार्य किया। उन्होंने कहा, "हमारी निःशब्द सेवा सदैव राष्ट्र के लिए रही है, और हम पर्वतीय क्षेत्रों में जीवन की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं, जहाँ प्रत्येक बचाव अभियान समय के विरुद्ध एक संघर्ष होता है।"इस अवसर पर सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

तिरंगा माउंटेन रेस्क्यू ने कई बड़े आपदा बचाव अभियानों का नेतृत्व और कई अन्य में सहयोग किया है जिनमें मणिपुर तुपुल भूस्खलन (2022), सिक्किम हिमनदीय झील विस्फोट बाढ़ (2023), वायनाड बाढ़ (2024) धराली भूस्खलन और अचानक आयी बाढ़ (2025) शामिल हैं।

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