दरभंगा , अप्रैल 22 -- बिहार के राज्यपाल सह विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन ने बुधवार को कहा कि उच्च शिक्षा की सभी समस्याओं का समाधान किया जाएगा। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन ने कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय में बुधवार को आयोजित सीनेट की 49वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि वे समस्याओं का निदान करने ही आये हैं। उन्होंने कहा कि वह कुलपति समेत अन्य पदाधिकारियों से बैठक कर सभी बिन्दुओं पर चर्चा करेंगे, इसके बाद पूरी समस्याओं को सुना जाएगा और हल भी निकाला जाएगा। इसी क्रम में उन्होंने ऑटोमेशन प्रक्रिया की बात की और समर्थ पोर्टल की चर्चा करते हुए उन्होंने विशेषज्ञों से मदद लेने की सलाह दी। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा सरकारी राशि के उपयोग की ऑडिट कराने पर भी जोर दिया। उन्होंने विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.लक्ष्मीनिवास पांडेय को निर्देश दिया है कि सभी लिखित समस्याओं को सप्ताह भर में राजभवन भेजें। जो स्थानीय स्तर पर हल होने वाली है,उसका निदान यहीं कर लें।
राज्यपाल ने सीनेट की नियमित बैठकों पर जोर देते हुए कहा कि समस्याओं को गहराई से समझकर ही ठोस समाधान निकाला जाएगा। उन्होंने विश्वास जताया कि विश्वविद्यालय, प्रशासन और मीडिया के सहयोग से शिक्षा व्यवस्था में सुधार संभव है। साथ ही उन्होंने दरभंगा में संस्कृत विश्वविद्यालय होने को गर्व की बात बताते हुए इसके विकास के लिए हरसंभव प्रयास का आश्वासन दिया।
कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. लक्ष्मीनिवास पांडेय ने सीनेट की बैठक को संबोधित करते हुए विश्वविद्यालय के कार्यकलाप की जानकारी दी और सभी सदस्यों से पूर्ववत सहयोग करते रहने की गुजारिश की। उन्होंने कहा कि संस्कृत पढ़नेवाले बच्चे भी बड़े-बड़े ओहदे एवं यश-कीर्ति हासिल कर सकते हैं। इसके लिए सिर्फ पूर्ण लग्न, समर्पण एवं निष्ठापूर्वक अध्ययन की आवश्यकता है।
कुलपति ने वर्तमान परिपेक्ष्य में भी संस्कृत शिक्षा को बेहद रोजगारोन्मुखी कहा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि संस्कृत के छात्रों को भी अन्य विषयों के छात्रों के समान पर्याप्त रोजगार के अवसर प्राप्त हैं। उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रमों में संस्कृत के अतिरिक्त हिन्दी, अंग्रेजी, राजनीतिशास्त्र, इतिहास, भूगोल, अर्थशास्त्र, गणित, कम्प्यूटर, सामान्यज्ञान एवं सामान्यविज्ञान आदि अनेक विषयों का समावेश है। इस पाठ्यक्रम का परिश्रमपूर्वक अध्ययन कर संस्कृत के छात्र अन्य विश्वविद्यालयों के छात्रों की भाँति यू.पी.एस.सी., बी.पी.एस.सी. एवं बैंकिग आदि प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त कर प्राशासनिक पदों पर नियुक्ति प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि सेना में धर्म गुरु एवं संस्कृत महाविद्यालयों एवं विद्यालयों में शिक्षक के पदों पर नियुक्ति के विशेष अवसर हैं। प्रतिवर्ष शिक्षाशास्त्र उत्तीर्ण होकर सैकड़ों छात्र संस्कृत शिक्षक पद पर नियुक्त हो रहे हैं।
कुलपति ने संस्कृत शिक्षा की पुरजोर वकालत करते हुए कहा कि संस्कृत पढ़कर जो सरकारी अथवा अर्धसरकारी सेवा में नहीं भी जाना चाहते हैं, उसके लिए भी यहां रोजगार के पर्याप्त अवसर प्राप्त हैं। जैसे कर्मकाण्ड, हस्तरेखा - विज्ञान, वास्तुशास्त्र, भागवत प्रवचन आदि का एवं कुण्डली निर्माण के द्वारा प्रत्येक संस्कृतज्ञ रोजगार के साथ-साथ सामाजिक प्रतिष्ठा भी प्राप्त करते रहे हैं। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में नूतन राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के परिप्रेक्ष्य में तथा भारतीय ज्ञान परम्परा के संवर्धन की दिशा में नए-नए कार्यक्रम प्रगति पर हैं।
कुलपति प्रो. पांडेय ने प्रत्यक्ष प्रमाण के तौर पर संस्कृत विश्वविद्यालय की चर्चा करते हुए उम्मीद जगाई कि इसके परिश्रमी एवं मेधावी छात्र देश के विभिन्न भागों में आई.ए.एस., आई.पी.एस., बैंकिंग एवं भारतीय सेना में नियुक्ति पाकर सेवारत हैं। हमारे प्राच्य विषयक छात्र विविध विश्वविद्यालयों में कुलपति, प्राचार्य, प्रधानाचार्य एवं शिक्षक के पदों को सुशोभित करते हुए विश्वविद्यालय का नाम रौशन कर रहे हैं। जो छात्र नौकरी नहीं पा सके हैं, वे भी स्वतन्त्र कर्मकाण्डादि व्यवसाय से अर्थोपार्जन कर अपनी आजीविका चला रहे हैं।
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