जयपुर , जुलाई 24 -- राजस्थान उच्च न्यायालय में शुक्रवार को जयपुर सहित राज्य के विभिन्न पुलिस थानों में वर्षों से लावारिस पड़े वाहनों के निस्तारण से जुड़े महत्वपूर्ण जनहित याचिका पर सुनवाई होगी।

अदालत इस मामले में राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत की जाने वाली अनुपालन रिपोर्ट पर विचार करेगी।

पिछली सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता विज्ञान शाह ने अदालत से रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा था, जिसे स्वीकार करते हुए अदालत ने स्पष्ट किया था कि अगली सुनवाई तक रिपोर्ट दाखिल नहीं की गई तो पुलिस अधीक्षक (यातायात), जयपुर को व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित होना होगा।

महेश झालानी की ओर से दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि राज्य के विभिन्न पुलिस थानों में जब्त और लावारिस वाहन वर्षों से खुले में पड़े हैं, जिनकी संख्या हजारों में है। समय पर निस्तारण नहीं होने से ये वाहन कबाड़ में तब्दील हो रहे हैं, थानों में स्थान की कमी पैदा हो रही है और सरकारी संपत्ति का भी नुकसान हो रहा है। याचिका में उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप इन वाहनों के समयबद्ध निस्तारण की मांग की गई है।

उच्च न्यायालय ने पूर्व में राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि जयपुर के पुलिस थानों में पड़े लावारिस वाहनों की संख्या, उनके निस्तारण के लिए उठाए गए कदम और भविष्य की कार्ययोजना का विस्तृत ब्यौरा अदालत के समक्ष पेश किया जाए। अब निगाहें आज की सुनवाई पर टिकी हैं कि सरकार अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करती है या नहीं। रिपोर्ट दाखिल नहीं होती है तो अदालत अपने पूर्व आदेश के अनुसार पुलिस अधीक्षक (यातायात), जयपुर की व्यक्तिगत उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दे सकती है।

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