नैनीताल , जून 15 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय सजायाफ्ता बंदियों की समय पूर्व रिहाई के मामले में सरकार के टालमटोल रुख के बाद अब अंतिम सुनवाई करेगा। अदालत ने सरकार से सभी मामलों में पृथक पृथक आपत्ति पेश करने को कहा है।

इस मामले में न्यायमूर्ति रवीन्द्र मैठाणी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ में सुनवाई हुई। इस मामले का उच्च न्यायालय ने स्वत: संज्ञान लिया है और कुछ बंदियों ने रिहाई की मांग करते हुए अलग अलग याचिकाएं दायर की हैं।

आज सरकार की ओर से दोहराया गया कि जघन्य अपराध वाले बंदियों की रिहाई समाज के लिए उपयुक्त नहीं है। अदालत राज्य सरकार के जवाब से संतुष्ट नजर नहीं आई। इसके बाद अदालत ने सभी मामलों में पृथक पृथक सुनवाई करने का निर्णय लेने की बात कहते हुए राज्य सरकार को सभी प्रकरणों में आपत्ति दर्ज करने को कहा है। अब अदालत सभी मामलों में पृथक पृथक सुनवाई कर अपना निर्णय सुनायेगी।

गौरतलब है कि उच्चतम न्यायालय ने सभी प्रदेश सरकारों को बंदियों की समय पूर्व रिहाई के निर्देश दिए थे। साथ ही सभी उच्च न्यायालयों को आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। इसी के बाद उच्चतम न्यायालय ने इस प्रकरण में एक जनहित याचिका दायर कर मामले का संज्ञान लिया है। हालांकि सरकार कई बंदियों की समय पूर्व रिहाई कर चुकी है। जघन्य या जघन्यतम अपराध वाले बंदियों की रिहाई नहीं की गई है। इस मामले में आगामी 13 जुलाई को सुनवाई होगी।

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