कोलकाता , अगस्त 17 -- कलकत्ता उच्च न्यायालय ने सोमवार को विधानसभा हस्ताक्षर जालसाजी मामले में तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी को दी गयी अंतरिम सुरक्षा नवंबर तक बढ़ा दी।
न्यायमूर्ति कौशिक चंदा ने इस राहत की अवधि बढ़ाई, जिसके तहत सीआईडी अपनी जांच के हिस्से के रूप में बनर्जी से पूछताछ कर सकती है, लेकिन उनके खिलाफ गिरफ्तारी सहित कोई भी दंडात्मक कार्रवाई नहीं कर सकती।
यह मामला उन आरोपों से संबंधित है, जिनमें कहा गया है कि पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के दस्तखत वाले लेटर पैड पर विधानसभा अधिकारियों को सौंपे गये एक पत्र में तृणमूल कांग्रेस के कई विधायकों के जाली हस्ताक्षर किये गये थे।
तृणमूल के बागी विधायकों ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा के अपने दस्तखत जाली होने का दावा किये जाने के बाद इन आरोपों ने राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया था। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष कार्यालय में लिखित शिकायत सौंपी गयी।
हेयर स्ट्रीट थाना पुलिस ने शुरू में इसकी जांच शुरू की थी, लेकिन आरोपों की गंभीरता को देखते हुए बाद में सीआईडी ने जांच अपने हाथ में ले ली। उच्च न्यायालय ने इससे पहले मामले में श्री बनर्जी को अंतरिम राहत दी थी और बाद में इसे आगे बढ़ाया था। अदालत ने सोमवार को एक बार फिर इस सुरक्षा को नवंबर तक बढ़ा दिया।
सीआईडी ने इस मामले के सिलसिले में श्री बनर्जी को भवानी भवन स्थित अपने मुख्यालय में कई बार समन भेजा था। वह शुरुआत में कई मौकों पर जांचकर्ताओं के सामने पेश नहीं हुए, लेकिन बाद में सीआईडी के समक्ष उपस्थित हुए और लंबी पूछताछ का सामना किया। जांचकर्ताओं ने उनसे इस घटनाक्रम में उनकी भूमिका के बारे में सवाल किये और इस जालसाजी के पीछे शामिल लोगों की पहचान करने की कोशिश की।
उच्च न्यायालय ने जांच जारी रखने की अनुमति देते हुए पहले यह स्पष्ट कर दिया था कि आवश्यकता पड़ने पर श्री बनर्जी से पूछताछ की जा सकती है, लेकिन उनके खिलाफ कोई कठोर कदम नहीं उठाया जा सकता। ताजा आदेश से वह सुरक्षा व्यवस्था बरकरार है।
इस विवाद की शुरुआत तृणमूल के निर्वाचित विधायकों ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा की शिकायतों से हुई थी, जिन्होंने आरोप लगाया था कि विधानसभा अध्यक्ष को सौंपे गये पत्र पर उनके जाली हस्ताक्षर किये गये थे। इसके बाद विधानसभा ने पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज करायी। बाद में श्री ऋतब्रत के नेतृत्व में निर्वाचित विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष को एक और पत्र सौंपा।
उसी पत्र के आधार पर स्पीकर रथींद्र बसु ने श्री ऋतब्रत को नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता दे दी, जिससे तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहे राजनीतिक विवाद को एक नया आयाम मिल गया।
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