जयपुर , मार्च 24 -- राजस्थान उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में व्हाट्सएप के माध्यम से दिए गए नोटिस को अवैध करार देते हुए भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) के एक अधिकारी को अदालत की अवमानना का दोषी माना है।

न्यायालय ने स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति की गिरफ्तारी या कानूनी कार्रवाई के लिए विधि द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है। केवल व्हाट्सएप जैसे माध्यम से नोटिस भेजना पर्याप्त नहीं माना जा सकता।

याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि एसीबी ने बिना वैधानिक प्रक्रिया अपनाए उसे नोटिस भेजा और गिरफ्तारी की कार्रवाई की। अदालत ने पाया कि नोटिस विधिसम्मत तरीके से तामील नहीं किया गया, जिससे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन हुआ।

उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि किसी भी आरोपी को उचित अवसर दिए बिना कार्रवाई करना कानून के खिलाफ है। अदालत ने यह भी दोहराया कि नोटिस की सेवा के लिए निर्धारित नियमों का पालन अनिवार्य है और डिजिटल माध्यम केवल सहायक हो सकते हैं, उनका स्थान वैधानिक प्रक्रिया नहीं ले सकती।

इस मामले में अदालत ने संबंधित एसीबी अधिकारी के आचरण को गंभीर मानते हुए उसे अदालत की अवमानना का दोषी ठहराया। न्यायालय ने कहा कि न्यायालय के आदेशों और प्रक्रिया की अनदेखी न केवल व्यक्ति के अधिकारों का हनन है बल्कि न्याय व्यवस्था की गरिमा को भी प्रभावित करती है।

न्यायमूर्ति प्रवीर भटनागर ने यह फैसला रवि मीना की याचिका पर को दिया।

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