नैनीताल , सितंबर 09 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने वन विभाग में वर्षों से कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों को उपनल कर्मचारियों की भांति समान कार्य के लिए समान वेतन एवं अन्य लाभ न दिए जाने के मामले पर बुधवार को सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से 18 सितंबर तक जवाब प्रस्तुत करने को कहा है।
न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की पीठ ने सरकार से यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि याचिकाकर्ताओं को अभी तक वेतन क्यों नहीं दिया गया। मामले की अगली सुनवाई 18 सितंबर को नियत की गई है।
मामले के अनुसार वन विभाग में कार्यरत कृष्णा नंद भट्ट व अन्य ने याचिका दाखिल कर बताया कि उनकी नियुक्ति डाटा एंट्री एवं ड्राइवर के पद पर आउटसोर्स एजेंसी के माध्यम से हुई थी, लेकिन पिछले 16 माह से उन्हें वेतन नहीं दिया गया है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि समान कार्य के लिए समान वेतन दिए जाने का सिद्धांत लागू होने के बावजूद सरकार उनके साथ भेदभाव कर रही है, क्योंकि उपनल के माध्यम से नियुक्त कर्मचारियों को सभी लाभ दिए जा रहे हैं, जबकि उनकी नियुक्ति उपनल के बजाय अन्य एजेंसी से होने के कारण उन्हें इससे वंचित रखा जा रहा है।
याचिका में प्रार्थना की गई है कि उन्हें भी उपनल कर्मचारियों के समान ही समान कार्य हेतु समान वेतन दिया जाए तथा सरकार को रुका हुआ वेतन भुगतान करने के निर्देश दिए जाएं।
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