जयपुर , जून 17 -- राजस्थान उच्च न्यायालय ने पूर्व मंत्री महेश जोशी की गिरफ्तारी से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान गिरफ्तारी की वैधानिक प्रक्रिया के पालन को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणियां की हैं।
न्यायालय ने बुधवार काे कहा कि पुलिस अधिकारियों और न्यायिक अधिकारियों को गिरफ्तारी संबंधी संवैधानिक एवं कानूनी प्रावधानों की बेहतर समझ और प्रशिक्षण की आवश्यकता है, ताकि नागरिकों के मौलिक अधिकारों का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।
मामला जल जीवन मिशन (जेजेएम) कथित घोटाले में पूर्व मंत्री महेश जोशी की गिरफ्तारी से जुड़ा है। श्री जोशी ने अपनी गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात पर गंभीरता से विचार किया कि गिरफ्तारी की प्रक्रिया के दौरान उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों और दंड प्रक्रिया से जुड़े प्रावधानों का पालन किस प्रकार किया गया।
उच्च न्यायालय ने टिप्पणी की कि कई बार जांच एजेंसियां और अधीनस्थ न्यायालय गिरफ्तारी से जुड़े कानूनी मानकों को पर्याप्त रूप से लागू नहीं कर पाते, जिससे अनावश्यक विवाद उत्पन्न होते हैं। न्यायालय ने कहा कि पुलिस अधिकारियों के साथ-साथ न्यायिक अधिकारियों को भी नियमित प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए, जिससे गिरफ्तारी, हिरासत और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े मामलों में कानून का समुचित अनुपालन सुनिश्चित हो सके।
उच्च न्यायालय ने हालांकि, मामले के गुण-दोष पर विचार करने के बाद महेश जोशी की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की कार्रवाई में हस्तक्षेप से इन्कार कर दिया। अदालत ने माना कि जांच एजेंसी को मामले की जांच आगे बढ़ाने का अधिकार है।
एसीबी ने पूर्व मंत्री महेश जोशी को जल जीवन मिशन में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया था। इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी इसी मामले में कार्रवाई कर चुका है।
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