नैनीताल , मई 14 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने प्रदेश के उत्तराखंड विद्युत पारेषण निगम लिमिटेड (पिटकुल) में निदेशक पद की भर्ती प्रक्रिया से जुड़े संशोधित सेवा नियमों पर प्रदेश के ऊर्जा महकमे के प्रमुख सचिव से व्यक्तिगत शपथपत्र दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि भर्ती नियमों में त्रुटि को सुधारने के लिए अभी तक क्या कदम उठाए गए हैं।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता एवं न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने इस मामले में गत 11 मई को सुनवाई की लेकिन आदेश की प्रति आज उपलब्ध हो पायी।
इस मामले को याचिकाकर्ता अनुपम सिंह की ओर से चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता प्रियंका अग्रवाल ने अदालत को बताया कि संशोधित भर्ती नियमों के अनुसार निदेशक पद के लिए वही व्यक्ति पात्र माना जाएगा जिसने बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में चीफ इंजीनियर/जनरल मैनेजर या उससे उच्च पद पर कार्य किया हो जबकि पुराने नियमों में केवल चीफ इंजीनियर/जनरल मैनेजर या समकक्ष पद का अनुभव पर्याप्त था और बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में होना आवश्यक नहीं था।
याचिकाकर्ता का कहना है कि पिटकुल में बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के भीतर चीफ इंजीनियर या जनरल मैनेजर का कोई पद अस्तित्व में ही नहीं है। ऐसे में संशोधित नियम उन्हें चयन प्रक्रिया से बाहर कर देंगे।
सुनवाई के दौरान कोर्ट के समक्ष वर्ष 2026 की पूर्व याचिका में ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव द्वारा दाखिल जवाबी हलफनामे का भी उल्लेख किया गया। उसमें सरकार ने स्वीकार किया था कि नियमों में ''अनजाने में त्रुटि'' रह गई है और उसे सुधारने की प्रक्रिया जारी है।
खंडपीठ ने कहा कि राज्य सरकार स्पष्ट करे कि नियमों में सुधार के लिए क्या कार्रवाई की गई है तथा यह भी बताए कि त्रुटि को कब तक ठीक किया जाएगा। साथ ही अदालत ने निर्देश दिया कि जब तक नियमों की त्रुटि दूर नहीं हो जाती, तब तक पिटकुल में निदेशक पद पर भर्ती के लिए कोई नया विज्ञापन जारी न किया जाए। मामले की अगली सुनवाई 25 मई को निर्धारित है।
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