नैनीताल , जुलाई 03 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने नैनीताल से कालाढूंगी मार्ग तक सड़क किनारे संचालित फड़-खोखों, होटलों, होम स्टे और फूड वैनों से निकलने वाले प्लास्टिक एवं अन्य कचरे को जंगलों और जलस्रोतों के आसपास फेंके जाने के मामले में राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं।
वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान नगर पालिका नैनीताल को निर्देश दिया कि बारापत्थर स्थित घोड़ा स्टैंड की नियमित सफाई कराई जाए और समय-समय पर स्थलीय निरीक्षण सुनिश्चित किया जाए, ताकि वहां का अपशिष्ट जलस्रोतों तक न पहुंच सके।
अदालत ने जिला प्रशासन से भी पूछा कि खुर्पाताल, वाटरफॉल और अन्य क्षेत्रों से निकलने वाले कचरे का निस्तारण कहां किया जा रहा है। साथ ही सड़क किनारे संचालित फड़-खोखों और फूड वैनों के लिए वेंडिंग जोन विकसित करने की दिशा में अब तक की गई कार्रवाई की प्रगति रिपोर्ट भी चार सप्ताह के भीतर प्रस्तुत करने को कहा।
सुनवाई के दौरान नगर पालिका की ओर से अदालत को बताया गया कि सर्वे के दौरान इस मार्ग पर 36 फड़-खोखों और पांच फूड वैनों को चिह्नित कर उनकी रिपोर्ट जिला प्रशासन को भेज दी गई है। वहीं राज्य सरकार ने कहा कि सड़क किनारे से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जा चुकी है।
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि पूर्व में दिए गए आदेशों का अभी तक प्रभावी अनुपालन नहीं हुआ है और क्षेत्र के लोग आज भी प्रदूषित जल पीने को मजबूर हैं। अदालत ने राज्य सरकार से प्लास्टिक कचरे के निस्तारण के लिए उठाए गए कदमों पर भी शपथपत्र दाखिल करने के निर्देश दिए। खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद निर्धारित की है।
याचिका में कहा गया है कि नैनीताल-कालाढूंगी मार्ग पर संचालित होटल, होम स्टे, फूड वैन और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान प्लास्टिक कचरा और सीवरेज का उचित निस्तारण नहीं कर रहे हैं, जिससे सड़ियाताल, खुर्पाताल समेत कई जलस्रोत प्रदूषित हो रहे हैं। याचिका में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानकों का पालन सुनिश्चित कराने और नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।
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