नैनीताल , दिसंबर 09 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने वर्ष 2011 से 2019 के मध्य हुए छात्रवृत्ति घोटाले की विशेष जांच (आडिट) महालेखाकार से कराये जाने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए महालेखाकार और प्रदेश सरकार से दस दिन में स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।

मुख्य न्यायाधीश जी0 नरेंदर और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने इंटरनेशनल पब्लिक वेलफेयर सोसायटी की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद यह निर्देश जारी किए। इस मामले में सोमवार को सुनवाई हुई।

याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि प्रदेश में वर्ष 2011 से 20214 के मध्य निजी महाविद्यालयों द्वारा अनुसूचित जाति-जनजाति के छात्रों के फर्जी नामांकन के माध्यम से छात्रवृत्ति की धनराशि हड़पने का मामला सामने आया था।

उच्च न्यायालय के निर्देश पर इस मामले की जांच विशेष अनुसंधान दल (एसआईटी) की दो टीमों की ओर से की जा रही है। अभी जांच पूरी नहीं हो पायी है।

इस मामले में अभी तक 156 मामले दर्ज हो चुके हैं और एसआईटी 100 से अधिक लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है।

याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि वर्ष 2018 से अभियोजन लंबित होने के चलते एससी-एसटी के छात्र उच्च शिक्षा में प्रवेश प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं। साथ ही आपराधिक मुकदमों के समाप्त होने की भी कोई संभावना नजर नहीं आ रही है। लंबित मामले के चलते उच्च शिक्षा में एससी-एसटी के छात्रों के प्रवेश में गिरावट आई है।

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