नैनीताल , अप्रैल 22 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने अल्मोड़ा जिले में निर्माण कार्य का मलबा जीवनदायिनी कोसी नदी में डाले जाने के मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार से चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश चन्द्र जोशी की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश पारित किया।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि अल्मोड़ा जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में निर्माण कार्य का मलबा सीधे कोसी नदी में डाला जा रहा है, जिससे न केवल नदी प्रदूषित हो रही है बल्कि अल्मोड़ा शहर सहित आसपास के क्षेत्रों की पेयजल आपूर्ति भी प्रभावित हो रही है। बताया गया कि इस नदी से शहर के एक लाख से अधिक लोगों को पेयजल आपूर्ति होती है।
यही नहीं मलबा डालने से ग्रामीणों का मुख्य मार्ग क्षतिग्रस्त हो गया है, जिससे स्थानीय लोगों को आवाजाही में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अदालत को यह भी बताया गया कि मलबा नदी में डाले जाने से बरसात के दौरान बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है और पंपिंग योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं। इस पर खंडपीठ ने सरकार को चार सप्ताह में जवाब देने के निर्देश दिए हैं। अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी।
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