लखनऊ , मई 21 -- इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ बेंच ने बृहस्पतिवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए लखनऊ की भाजपा मेयर के सभी वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार सीज कर दिए।
कोर्ट ने यह सख्त कार्रवाई निर्वाचित सपा पार्षद को शपथ न दिलाए जाने के मामले में की है। उच्च न्यायालय ने आदेश दिया कि अब नगर निगम के सभी काम जिलाधिकारी और नगर आयुक्त देखेंगे। यह पूरा मामला लखनऊ नगर निगम के वार्ड संख्या-73 फैजुल्लागंज से जुड़ा है। सत्र अदालत ने सपा के ललित किशोर तिवारी को यहां से पार्षद पद पर निर्वाचित घोषित किया था। कोर्ट के फैसले के 5 महीने बीत जाने के बाद भी मेयर की ओर से उन्हें अब तक शपथ नहीं दिलाई गई। इसी को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने मेयर के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि निर्वाचित जनप्रतिनिधि को शपथ न दिलाना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का उल्लंघन है। कोर्ट ने तत्काल प्रभाव से मेयर के सभी वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार फ्रीज करने का आदेश दिया।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद लखनऊ नगर निगम का कामकाज अब जिलाधिकारी और नगर आयुक्त की देखरेख में होगा। मेयर अब कोई भी नीतिगत या वित्तीय फैसला नहीं ले सकेंगी। कोर्ट ने अगली सुनवाई तक यह व्यवस्था लागू रखने को कहा है।
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