जयपुर , अप्रैल 17 -- राजस्थान में राजस्थान उच्च न्यायालय ने अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि मृतक कर्मचारी की बहू भी अनुकंपा नियुक्ति की हकदार हो सकती है।

न्यायालय ने विभाग की ओर से उठाई गई आपत्तियों पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि यह आश्चर्यजनक है कि वही तर्क दोबारा प्रस्तुत किए गए, जिन्हें पूर्व में न्यायालय खारिज कर चुका है।

यह फैसला न्यायमूर्ति रवि चिरानिया की एकल पीठ ने शुक्रवार को सुनाया। मामले में याचिकाकर्ता संगीता देवी ने अपने ससुर की मृत्यु के बाद अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया था। उनके ससुर राज्य सरकार के एक विभाग में कार्यरत थे और सेवा के दौरान ही उनका निधन हो गया था। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण संगीता देवी ने नियमों के तहत नौकरी की मांग की।

हालांकि संबंधित विभाग ने उनके आवेदन को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि बहू को अनुकंपा नियुक्ति का अधिकार नहीं है। विभाग ने तर्क दिया कि केवल पत्नी, पुत्र या पुत्री ही इस श्रेणी में आते हैं। इसके खिलाफ संगीता देवी ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आर सी गौतम ने कोर्ट में पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि पूर्व में भी ऐसे मामलों में अदालत स्पष्ट कर चुकी है कि परिवार की वास्तविक निर्भरता को देखते हुए बहू को भी अनुकंपा नियुक्ति दी जा सकती है, विशेषकर तब जब वह मृतक कर्मचारी के परिवार का हिस्सा हो और आर्थिक रूप से उसी पर निर्भर हो।

न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा कि अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य केवल नियमों की कठोर व्याख्या करना नहीं, बल्कि पीड़ित परिवार को त्वरित आर्थिक सहायता प्रदान करना है। न्यायालय ने यह भी कहा कि विभाग द्वारा बार-बार उन्हीं आधारों पर आवेदन खारिज करना न्यायिक आदेशों की अवहेलना के समान है।

अदालत ने विभाग को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ता के मामले पर पुनर्विचार करे और पूर्व के न्यायिक निर्णयों को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय ले। साथ ही यह भी कहा कि याचिकाकर्ता सभी आवश्यक शर्तों को पूरा करती है, तो उन्हें अनुकंपा नियुक्ति प्रदान की जाए।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित